साधक को यह प्रयत्न करना चाहिए कि उसकी शरीर नित्य श्री वृन्दावन धाम में ही रहे; पर यदि किसी दुर्भाग्यवश (किसी विवशता के कारण) ऐसा संभव न हो, तो जहाँ भी...