ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
5 itemsभक्त प्रकार अनेक विधि, मन-मन औरै बात
भक्तों के अनेक प्रकार होते हैं और उनके भीतर भक्ति-भाव और साध्य भी भिन्न-भिन्न होते हैं, पर जो अनन्य भक्त वृन्दावन-युगल-केलि-रस के रसिक होते हैं, उन्हे...
धावत वृंदा विपिन तजि, जे जन आन विचारि
जो लोग स्वार्थ से प्रेरित होकर वृन्दावन-रज का परित्याग कर अन्य स्थानों को चले जाते हैं, मानो वे अनधिकारी होने के कारण इस अलौकिक भूमि से निष्कासित कर द...
जे सेवत वृन्दाविपिन
जो भक्त वृन्दावन का सेवन करते हैं और युगल युगल श्री श्यामा-श्याम के उपासक हैं एवं युगल रस में हैं, वे वैकुण्ठ के सुखों की ओर आँख भर भी नहीं डालते।
नवल
मेरे नेत्रों में नवलप्रिया श्री राधा की यह घ्यान-छवि सदैव विराजित रहे कि वे प्रियतम के कण्ठ में अपनी ललित बाहुलता अर्पित किये हुए वृन्दावन की सघन लता ...
दुर्लभ वृंदा-विपिन है, राख्यौ सब तें गोइ
श्री वृन्दावन धाम अत्यंत गोपनीय, दिव्य और देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। अतः जो व्यक्ति भक्तिभाव से रहित और अभागा है, वह यहाँ कैसे वास प्राप्त कर सकता ह...