जिनके हृदय में व्रज-गोपियों के प्रेम (गोपी प्रेम) ने आड़े होकर मार्ग रोक लिया है, वे इस विहार-रस का कथन-श्रवण करके व्यर्थ श्रमित होते हैं और अंतिम धाम...