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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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यमुना वृन्दाविपिन की, बरनी केलि अनूप
श्री यमुना के तट पर स्थित श्री वृन्दावन की केलि अनूप और अवर्णनीय है। जो साधक निरंतर इस लीला की भावना करता है, वह अंततः उसी भावना में तन्मय होकर लीला-र...
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दोऊ कोक कलानि में, पंडित परम प्रवीन
श्री प्रिया-प्रियतम (राधा-कृष्ण) दोनों ही रति-कलाओं और दिव्य प्रेम-क्रीड़ाओं में परम चतुर और प्रवीण हैं। इस रस-विलास का जिह्वा द्वारा वर्णन करना असंभव...