ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
24 itemsसाधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोग
न तो मैंने कोई साधन किया है, और न ही करने योग्य हूँ। यह तो एकमात्र बिहारिनी श्री राधा रानी की कृपा है कि सहज ही वृन्दावन रस अर्थात् नित्य विहार रस का ...
सब सारनि को सार सुनि
रसिक अनन्य श्रीबिहारिनदेवजी का परम सिद्धांत है कि समस्त शास्त्रों का सार और भक्ति के समस्त तत्त्वों का चरम निष्कर्ष यही है कि अनन्य भाव और पूर्ण ममता...
श्री वृन्दावन जब देखौं तबहिं
हर बार जब भी मैं वृन्दावन को देखता हूँ, मुझे परमानन्द की प्राप्ति होती है। मेरा मन दैविक रस में जब भी डगमगाता है, वृन्दावन का दैविक प्रभाव मेरे जीवन ...
एक आस एक वास करि
अपने हृदय में केवल एक ही आसरा रखो, एक ही धाम का आश्रय लें और एक ही इष्टदेव का अनन्य भजन करें। श्रीबिहारिनदेवजी का परम सिद्धांत है कि जब साधक एकनिष्ठ ह...
नित्य बिहारिनि दासी कहत श्यामा के रस बस
नित्य बिहारिनि दासी कहत श्यामा के रस बस, संतत श्याम अधीन दीन मन मोहन मृदु रस। - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी नित्य बिहारिनि श्री राधारानी...
देत आसीस विहारिनि दासी करहुं नवल नित रलियां
- श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी श्री बिहारीन देव श्री युगल सरकार को आशीर्वाद देते हैं और कहते हैं, की आप हमेशा श्री वृंदावन में नए-नए अद्भ...
जो चाहे चित दै, महिलन के अंग संग अनुसार
- श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी श्री बिहारिन देव जी कहते हैं की जो निज महल अर्थात राधा रानी के महल में निवास करती हैं ऐसी सखियों के अंग सं...
रसिक अनन्य सौं मिलै
श्री बिहारिन देव जी कहते हैं, "रसिकों से मिलें और 'रसोपासना' (आनंदमय भक्ति) पथ के बारे में चर्चा करें। केवल और केवल श्री कुँजबिहारिणी श्री राधा का भजन...
रसिक अनन्य की सभा
रसिक अनन्य (श्री युगल के निष्काम, अनन्य भक्तों) की सभा में कर्मकांडी लालची लोग लज्जित हो जाते हैं, क्योंकि जहाँ प्रेम की प्रधानता में श्री श्यामा-श्या...
श्री वृन्दावन जब देखौं तबहिं
हर बार जब भी मैं वृन्दावन को देखता हूँ, मुझे परमानन्द की प्राप्ति होती है। मेरा मन दैविक रस में जब भी डगमगाता है, वृन्दावन का दैविक प्रभाव मेरे जीवन क...
मेरौ मन श्री वृन्दावन अटक्यो, राख्यो श्री हरिदास विपुल बल, भूली न इत उत भटक्यो।
मेरौ मन श्री वृन्दावन अटक्यो, राख्यो श्री हरिदास विपुल बल, भूली न इत उत भटक्यो। - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (154) श्री...
स्वर्ग नर्क की आस न त्रास
स्वर्ग नर्क की आस न त्रास | जे रस रसिक बिहारिनि दास || - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी इस दुर्लभ नित्य विहार रस जो रसिकों द्वारा बताया गया...
सब ठाकुर कौ ठाकुर हरि
- श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, रस के सेवैया (1) यद्पि श्री कृष्ण समस्त ठाकुरों के भी ठाकुर हैं, परन्तु उनकी ठाकुर ठकुरानी श्री राधा रानी...
मेरे नित्य किशोर अजन्मा
- श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (143) श्री बिहारिन देव कहते हैं कि हमारे राधा कृष्ण का जन्म नहीं होता, और वो नित्य ही क...
लाल लड़ायें लाडियें, ललना सौं करि लाड
लाल लड़ायें लाडियें, ललना सौं करि लाड | श्री बिहारिनि दास संसार के, और सकल सुख छाड़ || - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी ...
श्री बिहारीदास परमारथी मिली
सच्चे परमार्थी जन को परस्पर श्री युगल रस एवं युगल यश को ही कहना, सुनना एवं चिंतन करना चाहिए। यह रस इतना दुर्लभ है कि संसारी लोगों को यह सुनकर सुहाएगा ...
अवध उड़ीसा द्वारिका, बद्री अरु केदार
अवध उड़ीसा द्वारिका, बद्री अरु केदार। ए न होहिं हरिदास के, समाईं न नित विहार। - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (237) नित्...
कूँची नित्य विहार की, श्री हरिदास हाथ
कूँची नित्य विहार की, श्री हरिदास हाथ | सेवत साधक सिद्ध सब, जाचत नावत माथ | - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (530) नित्य...
श्रीबिहारिनदास को यह बिसन राधा नाम हृदय धरि वसि रहैं वृन्दावन
- श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी श्री बिहारिन दास जी कहते हैं कि जीव अत्यंत प्रकार के नशे करता है जो तुरंत उतर जाता है और दुख/अशांति प्रदान...
अष्ट सिद्धि, नव निद्धि मुक्ति पद दें बौरावत दीख
अष्ट सिद्धि, नव निद्धि मुक्ति पद दें बौरावत दीख। श्री बिहारी दास अनन्य न टरि हैं, तजि वृन्दावन बीख। - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्ध...
सब सारनि को सार सुनि
श्री बिहारिन दास जी कहते हैं कि सब सारों का सार और सब भक्ति तत्त्वों का अन्तिम तत्त्व है कि अनन्यता एवं ममत्वपूर्वक एकमात्र श्री युगल सरकार में हर क्ष...
कोऊ मदमाते भांग के, कोउ अमल अफीम
कोऊ मदमाते भांग के, कोउ अमल अफीम, श्री बिहारीदास रसमाधुरी, मत्त मुदित तोफीम || - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (297) को...
एक आस एक वास करि
केवल एक ही आशा रखो, एक ही धाम रखो, एक ही इष्टदेव का भजन करो। श्री बिहारिन देव जी कहते हैं—एक अनन्य भाव से भजन, युगल सरकार में विश्वास और रस में नित्य ...
साधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोग
न तो मैंने कोई साधन किया है, और न ही करने योग्य हूँ। यह तो एकमात्र बिहारिनी श्री राधा रानी की कृपा है कि सहज ही वृन्दावन रस अर्थात् नित्य विहाररूपी रस...