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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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नित हित चित के माहि, लाल किसोरी रटतु हैं
अपने हृदय को नित्य प्रेम-रस में डुबाकर, श्री कृष्ण नित्य ही “श्री राधा” नाम रटते हैं। उन्हें अन्य कुछ भी रुचिकर नहीं लगता; उनका समस्त दिन-रात इसी नाम-...
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राधे सुख को सार
हे श्री राधे! आप ही समस्त सुखों का सार और आधार हैं। आपके इसी सुखद रूप का दर्शन करने के लिए प्रियतम श्री कृष्ण निरंतर आपके पीछे-पीछे (संग-संग) लगे रहते...