हे श्री वृन्दावन! तुम अत्यंत रमणीय और सर्वोपरि रस-धाम हो। मेरी यही विनती है कि हे श्रीवन! आप किसी तरह मुझे अपनी उस अलौकिक छवि और सुखों की निधि—श्री श्...