सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
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तेरे नैंन मेरे नैंन मेरे नैंन तेरे नैंन

श्री राधारानी श्री कृष्ण से कहती हैं: तेरे नैंन मेरे नैंन हैं, और मेरे नैंन तेरे नैंन हैं, किसी और ठौर [जगह] हम दोनों के नैंन भूलकर भी नहीं जाते। [1] ...

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माँगौं न मोष भयोवास घोष

न मुझे मोक्ष की अभिलाषा है, न ही मेरे हृदय में कोई अन्य चाह शेष है; मेरी तो बस यही कामना है कि मैं उस ब्रज में वास करूँ जहाँ गौएँ स्वतंत्र भाव से विचर...

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तेरे नैन सावन की कारी अंधियारी घटा

श्री राधा श्री कृष्ण से कहती हैं: तुम्हारी आँखें यदि श्रावण महीने की वर्षा वाले काले बादलों की तरह हैं, तो मेरे नैन उनके ऊपर भारी गरजने वाले घनघोर बाद...

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ए विधना यह कीनौं कहा अरे

हे विधाता! यह तूने क्या कर दिया? मेरे हृदय में तूने ऐसी प्रेम-लहर क्यों जगा दी? [1] यदि प्रेम की लहर जगा दी तो जगा दी, पर फिर श्री श्यामसुंदर का इतना...