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वेदनाग क्रोश भूमिं स्वधाम्न: श्री हरि: स्वयम
श्री नारद जी कहते हैं कि भगवान श्री हरि ने चौरासी कोस ब्रज मंडल, गोवर्द्धन, एवं श्री यमुना जी को स्वयं गोलोक धाम से प्रकट रूप में भेजा है।
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राधाकृष्णेति हे गोप ये जपन्ति पुन: पुन:
जो मनुष्य श्री “राधा कृष्ण” यह बारम्बार रटता है उन को चारों पदार्थ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का क्या कहना साक्षात श्री कृष्ण चंद्र भगवान ही मिल जाते हैं।