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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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माँगूँ भुक्ति न मुक्ति राधे
माँगूँ भुक्ति न मुक्ति राधे, माँगू तव पद प्रेम राधे। - ब्रज रस माधुरी, जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज हे राधे, मैं भुक्ति मुक्ति कुछ नहीं मांगता, मुझ...
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बलि जाऊं लाली सुकुमार की
“बलि जाऊं लाली सुकुमार की, अभिरामिनि गज गामिनी भामिनी, स्वामिनी नंद कुमार की। " - प्रेम रस मदिरा, जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज मैं अत्यंत कृपालु श्री...
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चलो बरसाने मिले बरसानेवारी, नित्य किशोरी, ब्रज रस बोरी प्यारी
"चलो बरसाने मिले बरसानेवारी, नित्य किशोरी, ब्रज रस बोरी प्यारी” - ब्रज रस माधुरी,जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज चलो बरसाना में जाते हैं और बरसाने वार...
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बलि जाऊं लाली सुकुमार की
मैं अत्यंत कृपालु श्री राधा पर बलिहारी जाता हूँ, जो सुकुमारी हैं, अभिरामिनी अलमस्त गज के समान जिनकी चाल है, और जो श्री कृष्ण की स्वामिनी हैं।