ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
13 itemsप्रेम अकाम रहे नित राधा
प्रेम अकाम रहे नित राधा, सुख मानहुँ सुख राधा - ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है, श्री राधा के लिए आपका प्रे...
दिव्य धाम वृंदावन, गोविंद राधे
"दिव्य धाम वृंदावन, गोविंद राधे, ब्रज रसिकन राजधानी बता दे " - राधा गोविंद गीत, जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज वृंदावन ब्रज के रसिक संतों की राजधानी ...
एक दिन सुनेगी भरोसा भारी प्यारी
एक दिन सुनेगी भरोसा भारी प्यारी, छोड़ूँ नहिं पाछा प्रेम दे या न दे प्यारी। - ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज हे राधे, मुझे पूरा विश्वास...
श्री राधे बिनु ब्रह्म श्याम रस आधा
“श्री राधे बिनु ब्रह्म श्याम रस आधा। हमारो धन राधा।" - ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज पूर्ण भगवान श्री कृष्ण का रस श्री राधा के बिना ...
तेरा नाम तो है बड़ा तुझसे भी प्यारी। नाम के अधीन रहे नामी तू भी प्यारी ||
हे राधे, आपका नाम इतना महान है, की यह आप से भी बड़ा है क्यूंकी आप अपने नाम के अधीन हैं। जो भी व्याकुल हृदय से आपका नाम पुकारता है तो वह नाम सुनते ही ...
जाको याचत सारंग पानी
जाको याचत सारंग पानी, करु कृपा कोर राधे रानी। - ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज हे श्री राधे! आप जैसी स्वामिनी कौन है जिनकी श्री कृष्ण...
दोउ सेवक दोउ सेव्य परसपर
“दोउ सेवक दोउ सेव्य परसपर, दोउ चित दोउ चितचोर। दोउ मिलत लगत दोउन कहँ, पल सम कलप करोर। ” - ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज श्री राधा कृ...
मेरी राधा रानी सम मेरी राधा रानी
मेरी राधा रानी सम मेरी राधा रानी, जाके पाछे पाछे डोले सारंग पानी। - ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज केवल और केवल श्री राधारानी की तु...
श्यामा श्याम शरण गहु रे मन
अरे मन ! तू राधा-कृष्ण के चरण-कमलों की शरण में जा, तथा राधा-कृष्ण का स्वरूप अपने हृदय में रखकर उनके विविध नाम गुणादिकों को प्रेम-विभोर होकर गाता हुआ न...
रस बरसाने वारी, बरसाने वारी
“रस बरसाने वारी, बरसाने वारी। " - ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज जो ब्रज रस बरसाती हैं वो बरसाने वारी श्री राधारानी ही हैं।
श्री राधे बिनु चैन न पलछिन आधा
“श्री राधे बिनु चैन न पलछिन आधा। हमारो धन राधा ” - ब्रज रस माधुरी, जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज श्री राधारानी के बिना मुझे आधे क्षण के लिए भी चैन न...
वृन्दावन रस पावें गोविन्द राधे
जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज कहते हैं कि वृंदावन रस इतना दुर्लभ है कि रसिक जन भी केवल श्री राधा रानी की कृपा से प्राप्त कर पाते हैं। प्रेम मंदिर - व...
मेरी दाईं आँख पिए, बाईं आँख प्यारी
श्री राधा मेरी बायीं आँख में, श्री कृष्ण मेरी दाहिनी आँख में हैं। राधा कृष्ण की सुंदरता हर पल नई नई लगती है।