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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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राधाषोडशनाम्नां च
श्री राधा के सोलह नामों में से एक नाम 'वृन्दा' श्रुति-प्रसिद्ध है। श्री राधा का रम्य क्रीडावन होने के कारण श्री राधा को 'वृन्दावनी' भी कहते हैं।
general
रोगशोकमृत्युयमा वपन्ते नात्र संशय
जब भी कोई श्री राधा नाम लेता है, रोग, शोक, मृत्यु एवं यमराज राधा नाम से भयभीत होते हैं ।
shloka
आधौ नाम तारिहैं श्री ‘राधा’
- ब्रह्म वैवर्त पुराण - कृष्ण जन्म खंड - 13/107 ‘रा’ अर्थात आधा नाम राधा शब्द का ही काफी है भवसागर से पार होने के लिए ।‘ध’ कहने से हमारी जो रोज़ आयु नष...
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राधाषोडशनाम्नां च
श्री राधा के सोलह नामों में से एक नाम 'वृन्दा' श्रुति-प्रसिद्ध है। श्री राधा का रम्य क्रीडावन होने के कारण श्री राधा को 'वृन्दावनी' भी कहते हैं।
shloka
रोगशोकमृत्युयमा वपन्ते नात्र संशय
- ब्रह्मा वैवरत पुराण, कृष्ण जन्म खंड - 13/111 जब भी कोई श्री राधा नाम लेता है, रोग, शोक, मृत्यु एवं यमराज राधा नाम से भयभीत होते हैं |