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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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गौर श्याम नित एक रस, नौतन नेह अछेह
श्री वृंदावन में नित्य विहार में विलीन श्री श्यामा-श्याम एकरस विलसते हैं—एक आयु, एक मन, एक प्राण, पर दो देह।
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यह वृन्दावन यह समैं
इस समय श्री वृन्दावन धाम में दिव्य दम्पति श्री राधा–कृष्ण की प्रीति अत्यन्त अद्भुत है। श्री नागरीदास जी कहते हैं कि उनके हृदय में यह नित्य-विहार की रस...
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श्री राधे कीजै कृपा
श्री नागरीदास जी कहते हैं—हे राधे! हे समस्त सुखों की राशि! मुझ पर कृपा कीजिए और किसी भी प्रकार मुझे अपने निज धाम वृन्दावन में वास दीजिए।