ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
9 itemsपोढ़े श्यामा श्याम संग
श्री कृष्ण श्री राधा के संग रंग महल में विराज रहे हैं। [1] रंग महल में तीन द्वार हैं जिसमें रंगीन परदे लगे हुए हैं। [2] कई रंगों के अनमोल रत्नों से ज...
कृष्ण नाम जबतें श्रवण सुन्यो री आली
श्री नंददास जी एक सखी रूप से अन्य सखी से कहते हैं कि - हे सखि ! जब से कानो में कृष्ण का नाम सुना है , तब से मैं अपना घर संसार भूल, बाँवरी बन गयी हूँ। ...
देखों देखों री नागरनट
श्री नंददास कहते हैं "अरे सखी, तनिक देखो तो नागरनट को, सर पर मुकुट लटक रही है, श्री यमुना के पुलिन पर गोपियों के मध्य कैसा अनुपम नृत्य कर रहे हैं।" [1...
तेरी भौंह की मरौरन तें
इस पद में श्री राधिका मान करी हुई हैं और उनको मनाने एवं श्याम सुंदर से मिलवाने के लिए श्री नंददास प्रयत्न कर रहे हैं। वे कहते हैं: हे प्यारी राधिके, ...
सब सुख-रासि लाडिली राधा
लाडिली श्री राधा समस्त सुखों की राशि हैं, जिनके प्रेम-रस के प्रभाव में नित्य ही कुंज बिहारी (श्री कृष्ण) वश में रहते हैं। उनका स्मरण करने से अनंत जन्म...
श्रीवृषभान नृपति के आंगन
आज सब जन राजा श्री वृषभानु के प्रांगण में बधाई गीत गाकर उत्सव मना रहे हैं जहाँ रानी कीर्ति की कोख में समस्त गुणों से युक्त, सुख की खानी स्वरूपा एक पु...
चाँपत चरन मोहनलाल
श्रीकृष्ण वृंदावन में श्री राधिका जी के चरणों को दबा रहे हैं। ब्रज की प्यारी, नित्य किशोरी श्री राधा अपने शयन स्थान पर विराजमान हैं। कभी-कभी वे उन चरण...
पिय प्यारी के चरण पलोटत
श्री कृष्ण श्री राधा के चरण दबा रहे हैं, श्री ललिता एवं अन्य सखी पंखा झलने के लिए आती हैं तब श्री राधा घूँघट ओढ़ लेती हैं। [1 & 2] श्री राधा कृष्ण एक...
पोढ़े श्याम श्यामा संग
श्री श्यामसुंदर श्री श्यामा जू के संग रंग महल में पौढ़े हैं एवं द्वार पर सुरंग पर्दा लगा हुआ है। [1 & 2] कक्ष में अंगीठी जल रही है जिसका प्रकाश श्री श्...