हे आनंद-निधि, समस्त सुखों के दाता श्री श्यामसुन्दर! मेरी यही प्रार्थना है कि आप किसी-न-किसी प्रकार से मुझसे अपना नित्य-सम्बन्ध बनाए रखें, अथवा हे मन! ...