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रहन देत नहिं और रस यहै प्रेम की टेक
वृन्दावन के प्रेमी संत कहते हैं कि प्रेम का यह हठ होता है कि वह अन्य किसी रस का समावेश नहीं होने देता। प्रेम का यह सहज स्वभाव है कि वह दो को एक कर देत...
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ऐसौ प्रेम न कहूँ ‘ध्रुव’, है वृंदावन माहिं
ऐसा अद्भुत प्रेम-रस केवल वृन्दावन के नित्य-विहार में ही है, अन्यत्र कहीं नहीं; जहाँ श्री श्यामा-श्याम नित्य संयोग में होते हुए भी (अर्थात् निमिष-काल क...