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राधा गोविन्द गीत

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

74 items
general

राधे नाम लेने वाला गोविंद राधे

श्री राधे नाम लेने वाला जीव श्री राधा रानी के बल से हरि [श्री कृष्ण] की हेंकड़ी को भी धूल में मिला देता है।

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जहां राधा तहाँ कृष्ण, गोविंद राधे

जहां राधा हैं वहीं कृष्ण हैं, जहां राधा कृष्ण दोनो हैं वहीं रसिक हैं।

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राधे नाम लेने वाला

जो जन “राधे" नाम जपता है वह सब को नचाने वाले श्री हरि को भी अपने इशारे पर नचा सकता है।

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श्याम कहें राधे कहु गोविंद राधे

श्याम कहते हैं “राधे” कहो, श्री राधे कहती हैं कि “श्याम” कहो, परंतु तुम तो “राधे श्याम" का गुणगान करो।

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राधे जू की कृपा शक्ति गोविंद राधे

श्री राधे जू की कृपा शक्ति अनहोनी को भी होनी कर देती है।

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राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे

श्री राधे नाम का ऐसा अद्बुत रस है कि ब्रज की लता पता इत्यादि भी नित्य “राधे राधे" गाते हैं।

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राधे नाम लेने वाला गोविंद राधे

जो जीव राधे नाम का जप करता है वह अभिमान पूर्वक [श्री राधा के प्रेम में विभोर] चलता है भले ही वह साक्षात भगवान श्री हरि के सामने चले।

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प्रेम के भिखारी कृष्ण गोविंद राधे

श्री कृष्ण प्रेम के याचक एवं श्री राधा प्रेम की साहूकार हैं ।

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चलु मन वृन्दावन गोविंद राधे

हे मन, वृंदावन की ओर चल, जिस दुर्लभ वृंदावन रस के आगे वैकुंठ धाम का रस भी न्योछावर है।

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ब्रजरस रस ऐसा गोविंद राधे

ब्रज रस ऐसा है कि साक्षात रस भी कहता है मुझे और और और पीना है।

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श्याम की कृपा जो चाहो गोविंद राधे

यदि श्री श्याम सुंदर की वास्तविक कृपा चाहते हो तो “राधे" नाम की दिन रात रटना लगा दो।

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प्यारी के पक्ष वारे गोविंद राधे

श्री प्यारीजू [राधा] के पक्ष वाले [जो अनन्य, निष्काम एवं नित्य श्री राधा की भक्ति करते हैं] औरों की तो क्या स्वयं भगवान श्याम सुंदर से भी नहीं भयभीत ...

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चारों वेद सार यह गोविंद राधे

चारों वेदों का सार यही है कि मन से नित्य श्री राधा के रूप को निहारौ एवं मुख से राधे राधे गाओ।

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मेरी सरकार तो है गोविंद राधे, श्री वृषभानुदुलार बता दे

मेरी सरकार तो एक मात्र श्री वृषभानुदुलार श्री राधिका हैं।

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स्वामिनी राधा रानी गोविंद राधे

सब की स्वामिनी एक मात्र श्री राधा ही हैं। हे किशोरी जी आपके समान केवल और केवल आप ही हो, और कोई नहीं है।

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श्यामा श्याम सखीजन गोविंद राधे

श्यामा श्याम सखीजन गोविंद राधे, प्राणप्यारा वृंदावन धाम है बतादे । - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (5930) श्री वृन्दावन धाम राधा क...

dham

श्याम धाम नंदगाम गोविन्द राधे

ब्रज में, श्री कृष्ण का निवास नंदगाँव है, श्री राधा का निवास बरसाना है। लेकिन दोनों युगल का (श्री कृष्ण और श्री राधा रानी) लीला धाम श्री वृंदावन धाम ...

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श्याम पै लुटा दो काम गोविंद राधे

हे मन, श्री कृष्ण पर अपनी सभी इच्छाओं का बलिदान कर दो और श्री राधारानी पर स्वयं श्री कृष्ण को न्योछावर कर दो।

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नर चहे स्वर्ग सुख, गोविंद राधे

"नर चहे स्वर्ग सुख, गोविंद राधे, स्वर्ग सुर चहे नर, तनु दिलवा दे। " जगद्गुरु श्री कृपालु महाराज, राधा गोविन्द गीत इंसान स्वर्ग का सुख पाना चाहता है ...

dham

वृन्दावन धाम सम गोविन्द राधे

कहीं भी कोई जगह नहीं है, जो कि 'श्री वृंदावन धाम' से उत्तम है।

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राधा नाम महिमा

राधे राधे बोल मन गोविंद राधे, राधे नाम सुनी यम शीश झुका दे। राधे नाम लेने वाला गोविंद राधे, जहां जाए, जाएं हरि साथ बता दे। राधे नाम लेने वाला गो...

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राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे

श्री राधे नाम का ऐसा अद्बुत रस है की सनक इत्यादि परमहंसों की भी सनक छुड़ा देता है।

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राधे नाम रस ऐसा

श्री राधे नाम का ऐसा अद्बुत रस है कि रसिक चाह करते हैं कि उन्हें अनंत कोटि रसना मिल जाए इसे पान करने कि लिए।

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आयु जल बुलबुला गोविंद राधे

आयु [मानव देह] एक पानी के बुलबुले जैसा है, किसी को नहीं पता यह कब फूट [समाप्त] हो जाए।

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राधे राधे गाये जा गोविन्द राधे

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते है, कि बस तुम 'राधे राधे' नाम स्मरण किए जाओ, एक दिन राधे नाम 'श्री राधारानी' को बुला देगा।

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राधे बिनु कल नहीं गोविन्द राधे

श्री राधा रानी के बिना श्री कृष्ण आधे पल के लिए भी जीवित नहीं रह सकते।

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श्री कृष्ण वृन्दावन गोविन्द राधे

श्री कृष्ण लगातार वृंदावन में नयी नयी लीला करते हैं।

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राधा तत्व जाने बिनु गोविन्द राधे

जो श्री राधातत्व को जाने बिना श्री कृष्ण की ही केवल भक्ति करता है, उसके समान मूर्ख इस विश्व में केवल वही है ।

dham

वृन्दावन धाम का तो गोविन्द राधे

" वृन्दावन धाम का तो गोविन्द राधे, चराचर प्रेम में ही मग्न है बतादे । " - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (5932) श्री वृन्दावन धाम ...

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प्रेम निष्काम जाको गोविन्द राधे

जिसका प्रेम निष्काम है प्रिया जी के चरणों में, वही ब्रज धाम में किशोरीजी की दासी बनता है ।

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गौर रूप रस ऐसा गोविन्द राधे

गौर रूप रस ऐसा गोविन्द राधे, श्याम रूप रस को भी बौना बना दे। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (6150) गौररुपी श्री राधारानी का रस ऐ...

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प्रिया पग चिन्हों पै गोविन्द राधे

प्रिया पग चिन्हों पै गोविन्द राधे, पिय का निछावर प्राण बता दे। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (6131) श्री प्रिया जू के चरण चिन्ह...

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राधे नाम लेने वाला गोविंद राधे

राधे नाम लेने वाला गोविंद राधे, राधे बल हरि को भी अंगूठा दिखा दे। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविंद गीत श्री राधे नाम लेने वाला (श्री राध...

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ब्रजरसरसिक तो गोविंद राधे

ब्रज रस के रसिक, द्वारिका के रस को भी ब्रजरस के सामने फीका बताते हैं।

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धन्य धन्य ब्रजधाम गोविंद राधे

ब्रज धाम धन्य धन्य है। समस्त ब्रजवासी नित्य केवल "राधे राधे" ही बोलते हैं।

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राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे

श्री राधा नाम रस ऐसा है, जैसा रस न कभी था, ना है और ना ही आगे कभी होगा।

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स्वामिनी का नाम आगे गोविंद राधे

सबसे पहले हमारी एकमात्र प्रिय स्वामीनी श्री राधा के नाम का उच्चारण करें, आप श्याम (श्री कृष्ण) के नाम का उच्चारण राधा नाम के पीछे कर सकते हैं।

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राधे राधे बोल मन गोविंद राधे

हे मन, नित्य राधे राधे रटन करो। इसका मुल्य मत पूछो, बस इस पर अपना जीवन न्योछावर कर दो।

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राधा तेरे उर में हैं गोविंद राधे

हे मन, श्री राधारानी तेरे हृदय में ही है, तू उनकी पतंग बन जा और डोरी श्री राधारानी को थमा दे, अर्थात श्री राधारानी के पूर्ण शरणागत हो जा।

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राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे

श्री राधा नाम रस का ऐसा प्रभाव है की नीरस ब्रह्म भी इस नाम का श्रवण करने से रसिक बन जाते हैं।

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राधा जैसी राधा हैं गोविंद राधे

श्री राधा रानी जैसी केवल श्री राधा हैं। उनके जैसी कोई और संपूर्ण ब्रह्माण्ड में कहीं नहीं है। श्री राधा सौंदर्य पर कोटि कोटि कामदेव भी न्यौछावर हैं।

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वृन्दावन धाम भी है गोविंद राधे

वृन्दावन धाम भी श्री कृष्ण के समान ही दिव्य एवं चिन्मय है। वृन्दावन धाम एवं श्री कृष्ण में भेद है ही नहीं।

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केलि निकुंज की हैं गोविंद राधे

श्री राधारानी केली निकुंज की भूषण मणि हैं।

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राधा जैसी राधा हैं गोविंद राधे

श्री राधा रानी जैसी केवल श्री राधा हैं। उनके जैसी कोई और संपूर्ण ब्रह्माण्ड में कहीं नहीं है। श्री राधा सौंदर्य पर कोटि कोटि कामदेव भी न्यौछावर हैं।

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राधा नाम महिमा

Radhe radhe bola mana! Govind radhe, Radhe naam suni yama, sheesh jhuka de. The one, who chants the name of Shri Radha, makes even the god of death bo...

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राधा रानी ठकुरानी गोविन्द राधे

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत (6414) श्री राधारानी श्री कृष्ण कि ठकुरानी हैं, एवं दिव्य प्रेम रस एवं सुख का दान करने वाली दाता है...

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तो को का पतो नाँय गोविन्द राधे, वृन्दावन राधारानी का है बतादे

क्या आपको पता नहीं हैं कि वृन्दावन धाम एक मात्र श्री राधारानी का है। श्री वृन्दावन धाम की रानी एक मात्र श्री राधारानी ही हैं।

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दसहुँ दिशा में गोविन्द राधे

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत (6114) मैं समस्त दिशाओं में केवल श्री राधा रानी को ही देखता हूं।

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" ब्रज है कमल जैसा गोविन्द राधे, वृन्दावन मकरंद जैसा बता दे | "

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत (5912) यदि ब्रज कमल के समान है तो वृन्दावन मकरंद के समान है |

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केलि निकुंज की हैं गोविंद राधे

श्री राधारानी केली निकुंज की भूषण मणि हैं।

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राधे बिनु कल नहीं गोविन्द राधे

श्री राधा रानी के बिना श्री कृष्ण आधे पल के लिए भी जीवित नहीं रह सकते।

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प्रेम निष्काम जाको गोविन्द राधे

जिसका प्रेम निष्काम है प्रिया जी के चरणों में, वही ब्रज धाम में किशोरीजी की दासी बनता है |

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राधे नाम रस ऐसा गोविंद राधे

श्री राधा नाम रस का ऐसा प्रभाव है की नीरस ब्रह्म भी इस नाम का श्रवण करने से रसिक बन जाते हैं।

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राधे नाम लेने वाला गोविन्द राधे

वह जो श्री राधा का नाम जप करता है, वह कभी भी और कहीं भी श्री राधा को बुला सकता है।

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गौर रूप रस ऐसा गोविन्द राधे

गौररुपी श्री राधारानी का रस ऐसा है कि श्याम रुपी श्री कृष्ण का रस भी उसके आगे एकदम फीका है।

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वृन्दावन धाम भी है गोविंद राधे

वृन्दावन धाम भी श्री कृष्ण के समान ही दिव्य एवं चिन्मय है। वृन्दावन धाम एवं श्री कृष्ण में भेद है ही नहीं।

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नर चहे स्वर्ग सुख, गोविंद राधे

इंसान स्वर्ग का सुख पाना चाहता है , लेकिन स्वर्गीय देवता भक्ति का आनंद रस प्राप्त करने के लिए मानव रूप प्राप्त करना चाहते हैं।

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प्रियतम सोचें मन गोविन्द राधे, जहाँ भी प्यारी पग धरें बता दे।

प्रियतम श्री कृष्ण मन में यह सोचते हैं कि ऐसा मेरा कब भाग्य होगा कि जहाँ जहाँ प्यारी राधा चलें वहां कि भूमि ही मैं बन जाऊं ।

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रुक्मणी तो हैं दासी गोविन्द राधे

रुक्मणी तो हैं दासी गोविन्द राधे, स्वामिनी हैं श्यामा श्री कृष्ण की बता दे || - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत (5992) रुक्मणी (महालक...

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श्याम धाम नंदगाम गोविन्द राधे

“ श्याम धाम नंदगाम गोविन्द राधे, श्यामा जू को धाम बरसानो बता दे | श्यामा श्याम दोनों का ही गोविन्द राधे, लीला धाम तो है वृन्दावन बता दे || ” - जगद्गुर...

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मन रह वृन्दावन गोविंद राधे

हे श्री राधा गोविंद, मेरा शरीर भले ही चौरासी लाख योनियों में भटकता रहे, परंतु मेरे मन को श्री वृन्दावन धाम का वास दिला दीजिये।

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दशहूँ दिशा में मोहिं गोविंद राधे

हे श्री राधा गोविंद, मुझपर ऐसी कृपा कर दीजिये की मैं दसों दिशाओं में जिस ओर भी देखूँ, मुझे केवल आप ही दिखाई दें।

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जिस पै हो राधा कृपा गोविंद राधे

जिस भाग्यशालि पर श्री राधा रानी कृपा कर दें, वही उनकी महिमा को जान सकता है, दूसरा नहीं।

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मन रह वृन्दावन गोविंद राधे

हे श्री राधा गोविंद, मेरे शरीर को क्यों न नरक की प्राप्ति करा दो, परंतु मेरे मन को श्री वृन्दावन धाम का वास दिला दो।

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सर्वप्रथम प्राथना है गोविंद राधे

हे श्री राधा गोविंद, मैं सर्वप्रथम आपसे यह प्रार्थना करता हूँ की कृपया अपने प्रेम का थोड़ा सा रस प्रदान कर मुझे उस रस का चस्का (आसक्ति) लगा दीजिये।

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वृन्दावन के तो गोविन्द राधे

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविन्द गीत (5931) वृन्दावन के लता, गुल्म एवं तरु सब कृष्ण भक्त हैं।

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राधे राधे नाम सुनि गोविंद राधे

जब मृत्यु के देवता यमराज किसी को श्री राधा के नाम का जाप करते हुए सुनते हैं, तो वे उस व्यक्ति के पापों की बही (अच्छे बुरे कर्मों का लेखा जोखा रखने की ...

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सदा मुस्कुराते रहें गोविन्द राधे, मेरी शुभकामना है उनको बता दे

मैं हृदय से यही कामना करता हूँ कि श्री राधा कृष्ण हर क्षण मुस्कुराते रहें ।

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वृन्दावन धाम का तो गोविन्द राधे

श्री वृन्दावन धाम के चर और अचर जीव तो केवल प्रेम में ही मग्न हैं |

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वृन्दावन धाम भी है गोविन्द राधे

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - राधा गोविंद गीत - 5917 श्री वृन्दावन धाम भी श्री कृष्ण के समान ही सेव्य एवं वंदनीय है।

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राधा तत्व जाने बिनु गोविन्द राधे

जो श्री राधातत्व को जाने बिना श्री कृष्ण की ही केवल भक्ति करता है, उसके समान मूर्ख इस विश्व में केवल वही है |

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श्यामा श्याम सखीजन गोविंद राधे

श्री वृन्दावन धाम राधा कृष्ण और सखियों को अपने प्राणों के समान प्रिय है |

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श्री कृष्ण वृन्दावन गोविन्द राधे

श्री कृष्ण लगातार वृंदावन में नयी नयी लीला करते हैं।

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राधे राधे गाये जा गोविन्द राधे

जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते है, कि बस तुम 'राधे राधे' नाम स्मरण किए जाओ, एक दिन राधे नाम 'श्री राधारानी' को बुला देगा।