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Sacred Scripture

राधास्तोत्रम्

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

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पूजा राधा जपो राधा राधिका चाभिवन्दने

पूजा राधा जपो राधा राधिका चाभिवन्दने। श्रुतौ राधा स्तुतौ राधा राधैवाराध्यते मया॥ - ब्रह्मांड पुराण, श्री राधास्तोत्रम् (3) श्री कृष्ण चंद्र कहते हैं...

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गेहे राधा वने राधा राधिका

श्री कृष्ण कहते हैं कि घर में भी मुझे और वन में भी राधा का अनुभव होता है। कुछ खाता-पीता हूँ, कहीं चलता हूँ, दिन हो, रात हो, सदा राधा राधा ही मेरे रोम ...

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राधा कृष्णात्मिका नित्यं कृष्णो

राधा की आत्मा सदा मैं श्रीकृष्ण हूँ और मेरी (श्रीकृष्णकी) आत्मा निश्चय ही राधा हैं। श्रीराधा वृन्दावन की ईश्वरी हैं, इस कारण मैं राधा की ही आराधना करत...

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राधा रससुधासिन्धु राधा सौभाग्यमञ्जरी

श्री कृष्ण कहते हैं कि मैं श्री राधा महारानी की आराधना करता हूँ क्यूँकि श्री राधा सुधा रस की सिंधु हैं, श्री राधासौभाग्य की जननी हैं एवं श्री राधा बृज...