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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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हम तो युगल रूप रस माते नाते के माने
हम तो श्री प्रिया प्रियतम के युगल रूप के रस में उन्मत्त हैं, अत: केवल हम युगल से ही अपना सारा रिश्ता मानते हैं। हम देह के नातेदारों को अपना मानते ही न...
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इन नैंनों मधि मोहन सोहन
मेरी आँखों के मध्य में श्रीकृष्ण का मनमोहक रूप समा गया है। धर्म और शिष्टाचार के मार्ग अब सब भूल चुके हैं और समस्त प्रकार के विधि/निषेध फीके पड़ गए हैं...
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जिनके देह नेह परि पूरण
श्री श्यामा श्याम की देह विशुद्ध प्रेम का प्रकाश है जिससे समस्त जग भी प्रकाशित होता रहता है। [1] जिन रसिकों ने उन गौर श्याम वर्ण की देह का स्पर्श किय...