ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
5 itemsआवति नेह की निधि प्यारी
प्रेम की राशि प्यारी श्री वृषभानुदुलारी आ रही हैं, जिनका रोम-रोम प्यारे श्री कृष्ण को सुख प्रदान करता है। [1] श्री राधा ने सर्वप्रथम विविध प्रकार के ...
या छवि ऊपर हौं बलिहारी
मैं दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण की उस छवि पर बलिहार जाता हूँ जब वे दोनों एक दूसरे का आलिंगन कर गले में हाथ डाले सुशोभित होते हैं। [1] वे दोनों रसिकशे...
आवति कुँवरि गज मद गति मंथर
प्रियतम श्यामसुन्दर के समस्त मनोरथ को पूर्ण करने के लिए, श्री किशोरीजी (श्री राधा) मदमस्त हाथी की गति से झूमते हुए आ रही हैं। [1] श्री किशोरीजी प्रेम...
प्यारी-मुख-मयंक निशि-भोर
श्रीराधाजू का मुख चंद्रमा के समान है, जो रूप और गुणों की सोलह कलाओं से युक्त है, जिसकी मंद मुस्कान की किरणें चारों ओर फैल रही हैं। [1] उनके अमृतमय अध...
अजहुँ समुझि कछु नाहिं गयौ
आज समझ लो, अभी कुछ भी नहीं खोया है—श्री हरि का भजन करो, भजन करो, भजन करो! [1] हे मन, भक्ति-रस का पान करो—अपनी मूर्खता को त्याग दो, त्याग दो, त्याग दो...