हे सखी! श्री श्यामा-श्याम का श्रृंगार एक समान है। उनके तन, मन और प्राण भी एक हैं। दोनों का स्वरूप अद्वितीय है, जिसकी कोई समानता कहीं दिखाई नहीं पड़ती...