ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
5 itemsकृपयति यदि राधा बाधिता
यदि समस्त बाधाओं को दूर करने वाली श्री राधा रानी कृपा कर दें, तो जीव के लिए ऐसी कौन सी श्रेष्ठ मर्यादा शेष रह जाती है तीनों लोकों में, जो ह्रदय में प्...
कृपयति यदि राधा बाधिता
यदि समस्त बाधाओं को दूर करने वाली श्री राधा रानी कृपा कर दें, तो जीव के लिए ऐसी कौन सी श्रेष्ठ मर्यादा शेष रह जाती है तीनों लोकों में, जो ह्रदय में प्...
श्यामसुन्दर शिखण्डशेखर स्मेरहास्य मुरलीमनोहर
हे मुरली मनोहर रसिक शेखर मधुर मुस्कान से सुशोभित श्याम सुंदर, मुझ पर कृपा कीजिए और अपनी प्राण प्रिया श्री राधारानी की चरण किंकरी बना दीजिए।
प्राणनाथ वृषभानुनन्दिनी श्रीमुखाब्जरसलोलषट्पद
हे, मेरे रसिक शेखर, श्री कृष्ण, आप नित्य ही श्री राधा (श्री राधा मुख) रस में डूबे हुए हैं, मैं केवल आपकी एक उद्देश्य से आराधना करता हूँ कि मुझे ऐसा अध...
संविधाय दशने तृणं विभो प्रार्थये व्रजमहेन्द्रनन्दन
हे रसिक शेखर, नंद नंदन, ब्रज शेखर आपसे पूर्णतः विनय पूर्वक एवं शपथ पूर्वक यह विनती करता हूँ कि आपकी प्राण वल्लभा श्री राधा ही जन्म जन्मांतर मेरी आराध्...