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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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विपिन वास दैनी प्रिया करुणा की भंडार
करुणा की भंडार श्री प्यारी जू (श्री राधा) ने कृपा कर मुझे श्री धाम वृंदावन का वास प्रदान किया है। जिन पर श्री राधा अपनी थोड़ी सी दृष्टि डाल देती हैं, ...
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उर प्रकाश हो रूप को
यदि कोई “श्री राधा” नाम का सतत जप करने का नियम दृढ़ता से धारण कर ले, तो शीघ्र ही उसके हृदय में श्री राधा का दिव्य रूप प्रकाशित होने लगे और नेत्रों में...
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कुंजभवन सर्वेश्वरी साहिबनी सिरताज
कुंजभवन सर्वेश्वरी, साहिबनी सिरताज। आनन्दकन्दनी मृदुल चित्त, सदा गरीबनिवाज॥ - श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, श्री राधा नाम अंक (16) क...
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रसविलसनी रसमगन नित
श्री रूपमाधुरी जी प्रार्थना करते हैं कि जो सदैव रस-विलास में निमग्न रहती हैं और जिनकी अनुपम छवि प्रत्येक क्षण नवीन एवं अद्भुत प्रतीत होती है, ऐसी श्री...