ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
8 itemsविशोकजे, भानुसुते, किशोरिके, राधे
श्री राधा जो विशोकजा तथा श्री वृषभानु की पुत्री हैं, वह अपने भक्तों को अभय प्रदान करती हैं एवं उन पर स्नेह की वर्षा करती हैं। श्री राधा ही मेरी एक मात...
विफलीकृतचंद्रमण्डले राधे पाद
जिनकी पद नख चंद्रिका ने चंद्र मंडल को निस्तेज कर दिया है, ऐसे श्री राधा के चरणों में करुण क्रंदन युक्त होकर मैं श्री वृंदाविपिन के आमोद और रस के आश्र...
नानावतारस्तव देवि मायया
श्री राधा की दैविक माया से ही नाना प्रकार के अवतार होते हैं और नंद का पुत्र उनकी चरणों की रज से उत्पन्न हुआ है। लालित्य की सीमा, श्री ललिता की चरण कृप...
आदौत्वमेवासि तथावसाने
हे श्री राधा! जगत की सृष्टि के आदि में तुम ही थीं, मध्य में तीन प्रकार से - विष्णु, ब्रह्मा और रुद्र बनकर सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार आदि तीन प्...
नमो नमस्तेऽस्तु परात्परायै
मैं बारंबार उनको प्रणाम करता हूँ, जो सर्वोपरि हैं, जिनके परे कुछ नहीं है, जिनका नाम राधा है और जो सम्पूर्ण सृष्टि की पालक हैं। जो कोई एक बार भी उनका न...
शाखोपरिष्ठा इह चन्द्रलेखा, भवेद्यथोक्तिः परमल्पदृष्टेः
जैसे किसी अत्यंत अल्प दृष्टि वाले व्यक्ति को यह कहकर कि “देखो उस वृक्ष की शाखा के ऊपर चंद्रमा दिखाई दे रहा है, संकेत से चंद्रमा का बोध कराते हैं”। उसी...
निरस्तसाम्येन च साम्य कल्पनात्वदीय
श्री राधा की तुलना किसी से करने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है [चाहे कोई कितना ही महान क्यूँ न हो] क्यूँकि श्री राधा तो ‘निरस्तसाम्य’ [समता रहित] हैं...
Namo Namastestu Paratparaayai
Namo Namastestu Paratparaayai Radhabhidhayai Nikhilashrayayai.Sakridgrinantastavanamaye Vai Te Twam Gatim Yantibhavpramuktah.- Shri Vanshi Ali, Shri R...