नित्य विहार के अनन्य उपासक को ना तो किसी की आशा रखनी चाहिए, ना ही किसी परिस्थिति का भय होना चाहिए। केवल अपने अनन्य व्रत का दृढ़ता से पालन करना चाहिए। ...