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Sacred Scripture

श्री स्वामीनीजी प्रार्थना

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

6 items
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अस्तंगच्छत्सूर्या शुशुक्षणौ

हे श्री राधे,ऐसा मेरा सौभाग्य कब होगा कि मेरा दिन भर का दुःख अस्त होते हुए सूर्य के हवन कुंड अग्नि में भस्म हो जाये तथा आपको प्रिय लगने वाले प्रियतम क...

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भूयान्मेऽभ्यव्हारस्तावक ताम्बूल चर्वित नैव

हे श्री राधे, मेरा यह सौभाग्य कब होगा, की इस भूमंडल में मेरा पोषाहार केवल आपके चर्वित ताम्बूल पर आधारित होगा, तथा आपकी करुणा दृष्टि कटाक्ष एवं मंद मुस...

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इत्थं जीवन मस्तु क्षणमपि

हे राधे, मैं ऐसी कामना करता हूँ कि मैं तत्काल प्राण त्याग दूँ यदि मैं एक क्षण के लिए भी आपसे दूर हो जाऊँ और मैं नित्य केवल और केवल आपकी ही शरण ग्रहण ...

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त्रिषणमिह भवदंघ्रिप्रणतिः

हे श्री राधे, मेरा त्रिकाल स्नान मात्र आपके चरणों में प्रणाम करने से पूर्ण हो तथा क्लेशों के निवारण के लिए जप स्तुति में मात्र अति प्रेम भाव पूर्वक आप...

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श्री राधे ! प्रियतम द्रक् सङ्गम

हे श्री राधे, क्या सदैव मेरी आँखें प्रियतम और आपकी आँखों के संगम के दर्शन से होने वाले अद्भुत प्रेम आनंद से अश्रु पूरित होंगी, न की जल से?

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भवतीनां प्रियसङ्गम संजात

हे राधे, ऐसा कब होगा जब आपको अपने प्रियतम श्याम सुंदर से मिलने पर जो अपार आनंद प्राप्त होता है जिसमें प्रत्येक क्षण नित्य नव रस उत्सव होता है, उसको दे...