ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
8 itemsसुनहु रसिक श्री वृन्दावन को जस
"सुनहु रसिक श्री वृन्दावन को जस, इहि वन नित्य नवीन युगल वर, द्रुम दल दिव्य श्रवत सलिता लस" - श्री विट्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जी की वाण...
जाके अधीन सदा ही सांवरो
श्री कृष्ण, ब्रज के चूड़ामनी हमेशा श्री राधा के नियंत्रण (आधीन ) में रहते हैं।
लालन तेरेई आधीन
हे श्री राधा, श्री कृष्ण हमेशा आपके आधीन रहते हैं, आप जो रस बरसाती हैं उस रस के वश में वह स्वयं को दीन महसूस करते हैं ।
हमारें माई स्यामा जू कौ राज
श्री विठ्ठल विपुल देव कहते हैं कि हमारे प्रेम-रस देश में केवल श्री श्यामा जू (श्री राधा) का ही एक-छात्र राज्य है, जिनके प्रेम के अधीन स्वयं ब्रज के शि...
हमारें माई स्यामा जू कौ राज
हमारी माई (सखी) श्री श्यामा जू का ही नित्य राज है। रसिक सिरमौर, ब्रज राज श्री कृष्ण भी हमेशा जिनके आधीन रहते हैं वह श्री राधा ही हैं। श्री राधा कृष्ण...
जाके अधीन सदा ही सांवरो
श्री कृष्ण, ब्रज के चूड़ामनी हमेशा श्री राधा के नियंत्रण (आधीन ) में रहते हैं।
सुनहु रसिक श्री वृन्दावन को जस
रसिक भक्तों श्री वृन्दावन धाम की महिमा एवं यश सुनें, इस वन में नित्य ही श्री युगल वर श्री राधा कृष्ण नित्य ही नवीन रहते हैं (अर्थात नित्य नवनमान रसयुक...
लालन तेरेई आधीन
हे श्री राधा, श्री कृष्ण हमेशा आपके आधीन रहते हैं, आप जो रस बरसाती हैं उस रस के वश में वह स्वयं को दीन महसूस करते हैं |