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Sacred Scripture
श्री वृषभानुपुर शतक
Author:Unknown Rasik
ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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नेत्रे बुभुक्षिते मे राधापदयोर्विलोकनायेह
इस ब्रजभूमि में मेरे नेत्र श्रीराधाजी के चरणों के दर्शन करने के लिए भूखे (उत्कण्ठित) हैं, हे वृन्दावन ! श्रीचरणों के दर्शन की महिमा-सुधा के दान द्वारा...
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संस्पृश्य तत्पादतलं किशोरकः
नवल किशोर अपने हस्तकमल की भङ्गिमाओं द्वारा श्रीकिशोरीजी के चरणकमल का स्पर्श करके, चरणकमल से मकरन्द-रज को अपने नेत्रों से लगा रहे हैं पुनरपि वे तृप्त न...