ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
7 itemsजिनके यह रससार
जिनके ह्रदय में श्रीधाम वृंदावन का यह सार रस समा गया है, उन्हें किसी अन्य रस की चर्चा सुनना भी सुहाता नहीं है। ऐसे रसिक भक्त नित्य ही इस रस में उन्मत्...
जे जन रसिक चकोर, मीन चातक व्रत धारी
इस रस मार्ग में चलने के अधिकारी केवल वे रसिक जन हैं जो चकोर, मीन एवं चातक के समान अनन्य व्रत को धारण करते हैं। अनन्यता से विहीन अन्य जीव इस रस मार्ग क...
कृपासिन्धु आनन्दकन्द दम्पति रसभीने
हे कृपा के सागर, आनंदकंद, और सदा रस में मग्न दिव्य युगल (श्री राधा-कृष्ण)! आपकी अनंत कृपा ने मेरे जैसे असंख्य मूर्खों और पतितों का उद्धार किया है।
यह अगाध निधि मधुर रस
प्रिया प्रियतम के इस अथाह मधुर रस रूपी निधि की छवि का वर्णन करना असंभव है। चटक रूपी मन सम्पूर्ण रस का पान करना चाहता है, परंतु एक बूंद ही उसे पूर्ण रू...
श्रीवृन्दावन सघन सरस-सुख
दिव्य श्रीवृन्दावन धाम सघन और सरस रस की खानी है, जिसकी छटा चारों ओर छा रही है। इन्द्र के नन्दनवन जैसे कोटि-कोटि वन श्रीवृन्दावन को निहारकर लज्जित हो र...
Yah Agadh Nidhi Madhur Ras
Yah Agadh Nidhi Madhur Ras, Chhavi Kachu Kahi Na Jai.Chatak Chehe Sab Hi Piyo, Pai Ik Boond Samai.- Shri Rasik Govind, Shri Yugal Ras Madhuri, Doha (1...
Shri Vrindavan Saghan Saras Sukh
Shri-Vrindavan Saghan Saras-Sukh, Nit Chhavi Chhaajat. Nandan-Van Se Koti-Koti, Jihi Dekhat Laajat. - Shri Rasik Govind, Shri Yugal Ras Madhuri (4)The...