(राग विहागरौ, इक ताल) (पद) सोवत जुगल किशोर चँवर हौ ढारौ। कबहुँक सेऊँ चरन नैननि में, नौतन नेह सुधा रस धारौं॥ [1] कबहुँक पद पल्लव राधे के, अपने नैन कन...