प्रस्तुत पद में सखि भावापन्न श्री हित हरिवंश जी कहते हैं कि मैं मोहन लाल के रंग में रँगी हुई हूँ।अथवा मोहन लाल जिस रंग में रँगे हैं उसी श्री श्यामा ज...