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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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कुंजबिहारिन लाडिली
वृन्दावन के कुंजों में विहार करने वाले लाडिली-लाल [श्री राधा-कृष्ण] चम्पा-फूलों की माला हृदय में धारण किए, रस में उन्मत्त होकर मुस्कुरा रहे हैं।
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ललित लाडिली लाल कैं, कंठ रही लपटाइ
श्री लाड़िली (श्री राधिका), श्री लाल जू (श्री कृष्ण) के कंठ से ऐसे लिपटी हुई हैं मानो उज्ज्वल कुंदन (स्वर्ण) के साथ नीलमणि सुशोभित हो रही हो, अथवा घने...
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महा रूप रस माधुरी, दंपति केलि विलास
श्री वृन्दावन निकुंज-महल में महारूप एवं महारस-माधुरी की वर्षा होती है, जहाँ दिव्य दंपति केली-विलास करते हैं। उस विपुल 'नित्य विहार' को श्री स्वामी हरि...