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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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जगद्भर्तुर्विश्वसम्मोहनस्य श्रीकृष्णस्य
श्रीवृन्दावन की अधिष्ठात्री देवी, श्रीवृन्दावन की पालिका श्रीराधा जिन्हें सम्पूर्ण संसार के अधीश्वर त्रिभुवन मोहन श्रीकृष्णचन्द्र अपने प्राणों से भी अ...
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क्वचिद् भूत्वा द्विभुजा कृष्णदेहा वंशी
कभी-कभी श्री राधा द्विभुज श्रीकृष्ण का वेश धारण कर लेती हैं और स्वयं वंशी बजाती हैं। उन श्रीराधिका जू को प्रसन्न करने के लिए देवों के देव श्री कृष्ण स...
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श्रुतय ऊचुः— सर्वाणि राधिकाया
श्रुतियों ने कहा — समस्त देवताओं की शक्ति श्रीराधिका से ही हैं। समस्त प्राणी श्रीराधिका से ही अस्तित्व में हैं। उन श्री राधिका को हम प्रणाम करते हैं।