ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
27 itemsकरुना सिंधु दयाल हो, बाँके विरदनि नाथ
हे बाँके बिहारी! जग में आप करुणा-सिंधु एवं दीनों के नाथ कहाते हो, ऐसी कब कृपा होगी कि आप मुझे निशि-दिन अपने साथ ही रखेंगे?
नित्य विहार अखंड है
श्री स्वामी हरिदास जी की उपासना में प्रिया-प्रियतम का अखंड नित्य-विहार ही प्रधान उपास्य तत्त्व है और वही उनका निज धर्म है। जहाँ अवतार-कथा का प्रवेश हो...
श्री स्वामी जू के सरन नित, रूपसखी विश्राम
मैं सदा ललिता-अवतार श्री स्वामी हरिदास जू की शरण में रहकर श्री वृन्दावन धाम में श्री श्यामा-श्याम की दिव्य जुगल-केलि का निरंतर दर्शन करता रहूँ—यही मे...
श्री वृंदावन माधुरी
मैं सदा श्री वृन्दावन की माधुरी को निरख-निरखकर उसका गुणगान करता रहूँ। श्री राधा, श्री कृष्ण और उनकी निज सखियाँ ही मेरे जीवन-प्राण हैं।
रूप सनातन ब्रज कह्यौ
समस्त रसिकों ने इस बात की प्रशंसा की है कि श्री रूप और सनातन गोस्वामी जी ने ब्रज का, श्री हरिवंश महाप्रभु ने वृन्दावन का और स्वामी श्री हरिदास जी ने न...
श्री स्वामी हरिदास को
जो जन अनन्य रूप से ललिता-अवतार स्वामी श्री हरिदास जी के सच्चे भाव से अनुगत होता है, वह सखी-भाव को प्राप्त होकर सदा श्री श्यामा-श्याम के अद्भुत नित्य-...
जाँचें और न देव कौ, नहीं तीरथ वृत आस
वृन्दावन के एकांत निकुञ्जों में नित्य-विहार करने वाले श्री बिहारी-बिहारिन के सिवा हमारा न तो किसी अन्य देवता से कोई संबंध है और न किसी तीर्थ-व्रत आदि ...
स्वामी बिना बिहार नहि, साधन करो अनेक
ललिता-अवतार, रसिक अनन्य नृपति, श्री स्वामी हरिदास जी की कृपा के बिना श्री राधा-कृष्ण के नित्य-विहार की प्राप्ति असंभव है, चाहे कोई असंख्य साधन क्यों न...
श्री स्वामी हरिदास की, सरिवर रसिक न और
अनन्य नृपति रसिक-शेखर ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी समस्त रसिकों के सिरमौर हैं, जिनकी समानता किसी भी रसिक से की नहीं जा सकती, क्योंकि वे समस्त रसो...
रतन खचित भुव जगमगति
ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी के आराध्य श्री बिहारी-बिहारिणी जू श्री वृंदावन के निभृत निकुंजों में तमाल और बेलि के समान आलिंगनबद्ध होकर अनवरत केलि...
भजन न कीनों मैं कछू, जानत नाहिन जोग
न तो मैंने कोई भजन किया है और न ही मुझे योग आदि का ज्ञान है। मुझे तो केवल रसिक शिरोमणि स्वामी श्री हरिदास जी की अहैतुकी कृपा का ही बल है, जिसके प्रभाव...
रंगमहल निधिवन सदा
निधिवन के रंगमहल में प्रिया प्रियतम की अनवरत केली को सदा निहारने वाले, रसिक अनन्यों में चूड़ामणि, स्वामी श्री हरिदास जी की जय हो।
श्री वृंदावन दंपति, जो चाहै रस रीति
जिसको श्री वृंदावन धाम की नित्य दंपति श्री बिहारी बिहारिनी जू की रस रीति प्राप्त करनी हो उसे श्री स्वामी हरिदास जी के चरणों से प्रेम बढ़ाना चाहिए।
श्री हरिदास अनूप अलि रसिक रूप बलिहार
रूप सखी कहते हैं कि स्वामी श्री हरिदास जी अद्वितीय हैं, मैं उनपर बार बार बलिहार जाता हूँ। वे इक-टक श्यामा कुंजबिहारी के अखंड नित्य विहार को ही अपलक न...
चरण कमल चित लाई कै गाऊँ गुन सुख-रासि
अपने चित्त को श्री प्रिया-प्रियतम के चरण कमलों में लगाकर उनके गुणों का गान करूँ, जो सुखों की राशि हैं। ऐसे आनंद निधि और नित्य कृपा बरसाने वाले श्री चर...
स्यामा स्याम निकुंज निधि
रसिक सिरमौर स्वामी श्री हरिदास जी के लाड़ले ठाकुर-ठकुरानी श्री श्यामा कुंजबिहारी निकुंज की निधि हैं। श्री रूप सखी जी कहते हैं कि उन दोनों की सुंदर छवि...
श्री स्वामी हरिदास के नवल निकुंज बिहार
श्री स्वामी हरिदास जी के परम लाड़िले, नवीन निकुंजों में नित्य विहार करने वाले बांके बिहारी ही सिरमौर हैं। उनकी छवि का छींटा पाकर ही दशावतार प्रकाश पात...
श्री हरिदास अनन्य जै, जिनकै प्रेम प्रधान
जो रसिकजन स्वामी श्री हरिदास जी के पूर्ण रूप से अनुगामी होते हैं, उनकी प्रधानता केवल प्रेम की ही होती है। वे सखीभाव को अंगीकार कर, प्रिया-प्रियतम को न...
श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि
जो स्वामी हरिदास जी के अनन्य जन हैं, वे युगलवर, श्री श्यामा कुंज बिहारी के नित्य विहार रूपी रस-केलि में ही अपने मन को लगाते हैं तथा युगल किशोर दंपति क...
मेरी स्वामिनी लाड़िली, लाड़ लड़ाऊँ भाई
अरे भाई, मेरी आराध्या, मेरी सर्वस्व स्वामिनी तो एकमात्र श्री राधा महारानी जू ही हैं, और उन्हीं को मैं नित्य लाड़ लड़ाता हूँ। न मैं किसी अन्य के गुण जा...
रतन-खचित वृदाविपुन भूमि लता-द्रुम रंग
श्रीधाम वृंदावन की दिव्य भूमि रत्नों से जड़ित है, जहाँ रंग-बिरंगी लताएँ और विविध रंगों के वृक्ष सौंदर्य बिखेर रहे हैं। उसी परम पावन भूमि पर श्री स्वाम...
Syama-Syam Nikunj Nidhi
Syama-Syam Nikunj-Nidhi, Shri Swami Sirmaur.Roop Lalit Ura Main Base, Jaanat Naahin Aur.- Shri Roop Sakhi, Siddhant Ke Doha (37)The beloved deity of S...
श्री वृंदावन बास वर, दियो न अनतहि जांउ
हे प्रभु! मुझे श्री वृंदावन का वास जो सर्वोपरि है उसे प्रदान कीजिए, जिसे पाकर मैं अन्यत्र कहीं न जाऊं। रसिक शिरोमणि ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी ...
Shri Swami Haridas Ke Naval Nikunj Bihar
Shri Swami Haridas Ke, Naval Nikunj Bihar.Chhavi Chheentein Chhahrat Hain, Tinke Dasa Avtar.- Shri Roop Sakhi, Siddhant Ke Doha (44)Shri Swami Haridas...
Shri Haridas Ananya Jai Jinkai Prem Pradhan
Shri Haridas Ananya Je, Jinkai Prem Pradhan.Pyari-Piya Niju Sakhini Ki, Roop Madhuri Paan.- Shri Roop Sakhi, Siddhant Ke Doha (31)Those Rasika devotee...
Ratan-Khachit Vrindavipun Bhumi Lata Drum Rang
Ratan-Khachit Vrindavipun, Bhoomi Lata-Drum Rang.Shri Swami Ke Laadile, Rache Sukeli Anang.- Shri Roop Sakhi, Siddhant Ke Doha (22)The divine land of ...
Sri Haridas Anany Jai Var Vihar-Ras Keli
Sri Haridas Anany Jai, Var Vihar-Ras Keli.Damapti Rati Gati Madhuri, Raakhi Nainani Jheli.- Shri Roop Sakhi, Siddhant Ke Doha (26)Those who are the ex...