ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
13 itemsराख्यौ बंस बिहार कौ
रसिक अनन्य चूड़ामणि श्री स्वामी हरिदास ने इस संसार में प्रकट होकर नित्य विहार की अखंड उपासना को प्रवाहित किया है। उनके बिना ऐसा कौन है जिन्होनें अपने ...
जप संजम नेम निषेध विधी व्रत
कोई व्यक्ति विभिन्न नियम जैसे जप, तप, व्रत, संयम, विधि-निषेध का पालन केवल तब तक कर सकता है, जब तक उसके हृदय ने विशुद्ध प्रेमरस का स्पर्श नहीं किया। [1...
श्री हरिदास के गर्व भरे
हम श्री हरिदास जी के गर्व से पूर्ण हैं और अनन्य भाव से प्रिया-प्रियतम के नित्य विहार-रस, जो महा-मधुर रस का सार है, को सतत पान करते रहते हैं। जो रसिक ज...
नित्यविहार अधार दुरयौ
इसको कर्म, ज्ञान, भक्ति, मुक्ति एवं वैकुण्ठ की इच्छा रखकर प्राप्त नहीं किया जा सकता। [2] इन सबकी तो बात ही जाने दो, क्योंकि यह तो ब्रज की रस रीति वाल...
बारक श्रीहरिदास विलोकत
श्री स्वामी हरिदास जी की कृपा-भरी दृष्टि से एक बार निहार लेने पर साधक सर्वोपरि नित्यबिहार रस को सहजता से ऐसे प्राप्त कर लेता है, जैसे तेल की बूंद सहज ...
साधन आन कोटि तप तीरथ
कोटि कोटि साधन, तप, तीरथ आदि करने से क्या लाभ यदि भक्ति रूपी सूर्य का ह्रदय में उजाला ही नहीं हो रहा। [1] भक्ति से विहीन होकर, अन्य साधन में लग लग कर...
काहू कै पूजा को आस
कोई तो पूजा में ही सतत आशा लगाये हुए है, कोई बेचारे इस लोक एवं स्वर्ग आदि के विषय विलास लालसाओं में लगे हुए हैं। कोई घर में, कोई जहां तहाँ वन में जाकर...
कोऊ विद्या विधि वेद बँध्यौं बल
कोई तो विद्या, वेद, विधि-विधान में, कोई धन, धर्म, कर्मकांड आदि कार्यों के जाल में जकड़े हुए हैं। [1] कोई यम-नियम, संयम-व्रत तथा जप-तप आदि में, तो कोई...
श्रीबिहारी बिहारिनि कौ जस गावत
जो जीव अनन्य भाव से श्री बिहारी-बिहारिनी का प्रेमपूर्वक यशोगान करता है, उस पर अनन्य नृपति रसिक शिरोमणि स्वामी श्री हरिदास जी अत्यंत प्रसन्न होकर विवशत...
उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभ
श्री ब्रज की रज का प्रभाव अत्यंत अलौकिक और विलक्षण है। इसका गुणगान स्वयं श्री शुकदेव परमहंस जी ने करते हुए कहा कि यह रज उद्धव, ब्रह्मा और अन्य देवों क...
अम्बर सम्बर बास बसे
जैसे घनघोर बादल आकाश में छा जाते हैं और फिर जल बरसाते हैं। यद्यपि वह जल नदियों को उमड़ाकर उनके किनारों और टीलों को ढहा देता है, फिर भी वह पुल के नीचे ...
सर्वोपरि कुँजबिहारिनी रानी
अकेले श्री राधा और राधा सर्वोच्च रानी हैं, जो निकुंज में हमेशा के लिए रहती है। यद्यपि श्री कृष्ण ब्रज के राजा हैं, लेकिन वह उनके द्वारा शासित हैं और ...
पिता सुत बंधु कहा सम्बंध
हे भाई! यह सर्वथा अकाट्य सिद्धांत है कि इहलोक-परलोक दोनों में ही प्रेम के बिना कोई नाता नहीं हुआ करता। इस संसार में माता, पिता, पुत्र और भ्राता आदि के...