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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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लगी है लगनि प्यारे पगी है सुरति तोसों
[यह एक विरह का भाव है] हे प्रियतम श्यामसुंदर! तुम्हीं से मेरी लगन लगी हुई है (अर्थात् मैं तुमको ही प्रेम करती हूँ) और तुम्हीं में मेरी स्मृति पगी हुई ...
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एक आस एकै बिसवास प्रान गहैं बास
हे प्रियतम! तुमसे पुनः मिलने की एक मात्र आशा और विश्वास के सहारे ही मेरे ये प्राण (शरीर में) बचे हुए हैं, क्योंकि, इन्हें अब किसी दूसरे से पहचान नहीं...
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चातिक चुहल चहुँ ओर चाहै स्वाति
विनोदी स्वभाव का चातक पक्षी संसार भर के जल को त्यागकर केवल स्वाति की बूंद ही चाहता है — वह अपने प्रण का ऐसा पालनकर्ता है कि अमृत भी उसके लिए विष बन जा...
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Chaatik Chuhal Chahu Aur Chaahai
(Kavitt)Chaatik Chuhal Chahu Aur Chaahai Swati Hi Kon,Soore Pan-Poore Jinhen Bish Sam Amee Hai.Praphulit Hot Bhaan Ke Udot Kanj-Punj,Taa Bin Bichaaran...