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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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प्यारी नैंकु निरखौ नवरंग लालैं
सखी बोली कि हे श्रीस्वामिनी ! इन नवरंगी लाल की ओर नैंक निरखो तो सही ! आपकी पदतली से दलित रज का निज मस्तक पर चरनाकृत कृति तिलक धारण करते हैं। [1] आप...
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नव वन नव निकुंज नव बाला
वृन्दावन में कभी नया वन, कभी नया निकुंज, कभी नई श्री राधा और अन्य सखियाँ, कभी नए रसिक कुंज बिहारी और कभी नित्य नया रस एवं लीला है !
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तें मोह्यौ प्यारी मेरौ लाल
श्री विठ्ठल विपुल देव जी अपने सहचरी स्वरुप में स्थित श्री प्रियाजी से कहती हैं कि "हे प्यारी ! आपने हमारे लाल को मोहित कर रखा है।" [1] जिन प्रेममयी व...
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नव वन नव निकुंज नव बाला
वृन्दावन में कभी नया वन, कभी नया निकुंज, कभी नई श्री राधा और अन्य सखियाँ, कभी नए रसिक कुंज बिहारी और कभी नित्य नया रस एवं लीला है !