ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
9 itemsश्री राधाबल्लभ गुन चरित
जिस अनन्य भक्त के हृदय में श्रीराधावल्लभ लाल के गुणों और उनकी लीलाओं का निरंतर वास रहता है, वह भक्त साक्षात समस्त सुखों और मंगलकारी निधियों का पुंज बन...
अहो कृष्ण करुणा करौ
अहो कृष्ण! कलियुग का प्रभाव अत्यंत प्रबल हो उठा है। कृपा कर मेरे हृदय की व्यथा हर लीजिए और अपनी करुणा से मुझे संरक्षण प्रदान कीजिए।
रसिक भक्त सौं हित करै
जब जीव किसी वास्तविक रसिक संत से अनन्य प्रेम करके ह्रदय की मैल का पूर्ण निवारण कर लेता है तब ह्रदय में श्री लाड़ली लाल प्रेमपूर्वक खेलने (लीला प्रवेश)...
जुगल भजन भींज्यौ रहै हिये गहगह्यौ नेह
ऐसा भक्त जो सदा युगल सरकार के भजन में लीन रहता है और जिसका हृदय गूढ़ प्रेम से ओत-प्रोत रहता है, वह तीनों लोकों को पवित्र कर देता है।
राधापति गति एक तुम मोकौं और न ठाउँ
हे राधा पति (श्रीकृष्ण)! आप ही मेरे एकमात्र आश्रय हैं। आपके अतिरिक्त मेरे लिए दूसरी कोई ठौर नहीं है। श्रीहित वृंदावन दास कहते हैं: “मैं बार बार बलिहार...
आगे की आगे गई अब न रुखाई देहु
जो बीत गया सो बीत गया प्रभु, कृपा कर अब कठोरता न दिखाइए। श्री हित वृंदावन दास जी विनयपूर्वक प्रार्थना करते हैं कि अपने इस दास की लाज को अपने हृदय में ...
उर नहीं खरक सनेह की
यदि हृदय प्रेम से विहीन है और मुख में “राधा श्याम” नाम नहीं है, तो हे वृंदावन दास, यह मानव जीवन व्यर्थ है।
Radha Pati Gati Ek Tum Mokao Aur Na Thaun
Radha Pati Gati Ek Tum, Mokaun Aur Na Thaun.‘Vrindaavan Hit’ Raavari, Tahal Dehu Bali Jaun.- Shri Vrindavan Das Chacha Ji, Vivek Lakshan Beli (107)O b...
Aage Ki Aage Gai Ab Na Rukhai Dehu
Aage Ki Aage Gai, Ab Na Rukhai Dehu.‘Vrindavan Hita’ Das Ki, Laaj Hiyein Dhari Lehu.- Shri Vrindavan Das Chacha Ji, Vivek Lakshan Beli (106)What is pa...