ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
12 itemsवंशीवट की माधुरी जो कहिये कछु बैन
वंशीवट की उस अलौकिक मधुरता का वर्णन शब्दों में कैसे किया जाए? यदि उसका बखान करना हो, तो नेत्रों में रस भरकर उसको जिह्वा बनाना होगा (देखने के लिए) और ज...
प्रेम अटपटी बात कछु
विशुद्ध प्रेम की अनुभूति शब्दों की सीमा से परे है। उसे न तो वाणी पूर्णतः व्यक्त कर सकती है और न तर्क समझा सकता है। इस प्रेम की वास्तविक स्थिति या तो ...
सुरझाये सुरझे नहीं उरझ रहे यह रूप
दिव्य युगल श्रीराधा-कृष्ण एक-दूसरे की रूप-माधुरी में इस प्रकार गुंथे हुए हैं कि उन्हें पृथक करना असंभव है। उनके स्वरूप परस्पर ऐसे एकाकार हो गए हैं कि ...
बार बार रीझि रीझि कहत विहारीलाल
श्री कृष्ण, प्रेम में उन्मत्त होकर, बार बार श्री प्रियाजी जी [श्री राधा] से कहते हैं कि हे प्यारी जू! वंशीवट की अद्भुत शोभा को निहारिये! [1] यमुना के...
माधुरी की रास सब शोभा को निवास जहां
रस से भरे श्री श्यामा श्याम, वंशीवट में स्थित रास मण्डल में मधुर रास नृत्य कर रहे हैं, जहाँ समस्त शोभा का निवास है। [1] उनके चरणों में नूपुर, हस्त कम...
वंशीवट तट निकट भूमि
यमुना तट के निकट वंशीवट की भूमि सदा वृक्षों और लताओं से आच्छादित हरिभरी रहती है जहां सर्वदा पिय प्यारी (राधा कृष्ण) नित्य विहार पारायण हैं।
पिय प्यारी को विहरिवो
यद्यपि प्रिया-प्रियतम की विहार लीलाओं को हृदय में सदा छुपाकर रखना चाहिए, परंतु मैं जितना-जितना इसे हृदय में छुपाने का प्रयास करता हूँ, वे उतनी ही सहजत...
कमल से लोइन ललित अति शोभा देत
कमल समान नेत्रों वाली श्रीराधा जू, अत्यंत लावण्यमयी छवि से, श्रीकृष्ण के संग विराजमान हैं, और करोड़ों कामिनियाँ भी उनके सौंदर्य के आगे फीकी लगती हैं। ...
आय कुँवर ठाड़े भये नवल कुंवरि के संग
कुँवर (श्यामसुन्दर) नवल कुँवरि (श्रीराधा) के संग यमुना-पुलिन में वंशीवट पर खड़े हैं जहाँ प्रेम-रस की अनंत तरंगें उमड़ रही हैं।
कहों कहां लों वरनि में वंशीवट की केलि
मैं प्रिया-प्रियतम की वंशीवट की उस अद्भुत दिव्य केली लीला को कैसे और कहाँ तक वर्णन करूँ क्योंकि उस रस को वही समझ सकता है जो स्वयं सहचरियों के संग उस ल...
श्यामा श्याम बैठे नव
श्री श्यामाश्याम नवीन फूलों की सेज पर विराजमान हैं, और एक-दूसरे की रूप माधुरी का दर्शन कर रहे हैं तथा एक-दूसरे का फूलों से श्रृंगार कर रहे हैं। [1] श...
शोभा नवल निकुंज की
शोभा नवल निकुंज की, क़हत बने नहिं बैन। कै जाने मन की दशा, कै माधुरि कै नैन॥ - श्री माधुरी दास, वंशीवट माधुरी (27) वृन्दावन में वंशीवट के नवल-निकुंज ...