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Sacred Scripture

वृषभानुपुर शतक

Author:Unknown Rasik

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

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पदयोः प्रविलाप्य यावकं

अपने कर-कमल की भङ्गिमा कलापूर्ण (चातुरी) से अपनी प्रेयसी के चरणों में महावर लगाकर अत्यन्त गम्भीर भाव रूपी सागर में निमग्न प्रियतम श्रीकृष्ण यहाँ (गह्...

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आपाययित्वाधरसंश्रितं मधु

श्रीलाड़िलीजी बीड़ी (ताम्बूल) चर्वण कर रही हैं, उस बीड़ी को अपने मुख से निकालकर लालजी को अर्पित कर रही हैं और लालजी उन किशोरीजी के श्रीमुख से चर्वित पान...

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यत्र गह्वरकं नाम वनं

बरसाने में गह्वर वन है, जिसे श्री राधा ने स्वयं निर्मित किया है जो उनकी नित्य केली विलास क्रीड़ा स्थल है, इसीलिए यह स्थल नित्य विहार माना गया है।

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जयत्यशेषाद्भुतमाधुरी सा

सम्पूर्ण माधुरी वाली, वृषभानुपुर [बरसाना] विजय को प्राप्त हो रही है, जिसके नाम को सुनकर ही श्री कृष्ण मूर्छा को प्राप्त हो रहे हैं।