सभी ग्रन्थ
Sacred Scripture
वृषभानुपुर शतक
Author:Unknown Rasik
ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
4 itemsgeneral
पदयोः प्रविलाप्य यावकं
अपने कर-कमल की भङ्गिमा कलापूर्ण (चातुरी) से अपनी प्रेयसी के चरणों में महावर लगाकर अत्यन्त गम्भीर भाव रूपी सागर में निमग्न प्रियतम श्रीकृष्ण यहाँ (गह्...
general
आपाययित्वाधरसंश्रितं मधु
श्रीलाड़िलीजी बीड़ी (ताम्बूल) चर्वण कर रही हैं, उस बीड़ी को अपने मुख से निकालकर लालजी को अर्पित कर रही हैं और लालजी उन किशोरीजी के श्रीमुख से चर्वित पान...
general
यत्र गह्वरकं नाम वनं
बरसाने में गह्वर वन है, जिसे श्री राधा ने स्वयं निर्मित किया है जो उनकी नित्य केली विलास क्रीड़ा स्थल है, इसीलिए यह स्थल नित्य विहार माना गया है।
general
जयत्यशेषाद्भुतमाधुरी सा
सम्पूर्ण माधुरी वाली, वृषभानुपुर [बरसाना] विजय को प्राप्त हो रही है, जिसके नाम को सुनकर ही श्री कृष्ण मूर्छा को प्राप्त हो रहे हैं।