सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतभगवत रसिक
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री भगवत रसिक वाणी संग्रह

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जयति नव नागरी, रूप गुन आगरी

नवनागरी किशोरी श्रीराधे, आप रूप और गुणों की खान हैं, सब सुखों की निधि है आपकी जय हो। आप अपार सौंदर्यशालिनी हैं, उज्जवल केली -विलास की कामनाओं से भरी ह...

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जासौं सपरस चाहिए

जिनके संसर्ग में नित्य रहना चाहिए, उन रसिक महापुरुषों से लोग दूर रहते हैं, और जिन आसक्त जीवों से दूर रहना चाहिए, उनसे चुम्बक की तरह मन चिपका रहता है।

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भगवत रसिक मनाय लाडिली

भगवत रसिक जी के शब्दों में "उन्होंने श्री राधा रानी को मना कर एवं उनका गुनगान करके ठाकुर जी को इतना रिझा लिया है की श्री बिहारी जी ने उनको अपनी आँख ...

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हमारो वृंदावन उर ओर

हमारे ह्रदय में नित्य वृंदावन है, जो माया तथा काल से परे है, जहां समस्त रसिकों के दिव्य चूड़ामणि युगल सरकार श्री राधा कृष्ण नित्य निवास करते हैं।