भावार्थ: वह जीव धन्य है जो श्री वृन्दावन धाम से जुड़ा है, नित्य रसिक संतो का आदर सम्मान करता हुआ उनसे प्रेम करता है। [1 & 2] मन - वचन - कर्म से साधन ...