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मुख्यपृष्ठसंतजगदगुरु श्री कृपालु महाराज
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री जगदगुरु श्री कृपालु महाराज वाणी संग्रह

general

युगल रस वृन्दावन बरसे

वृन्दावन में श्यामा - श्याम का दिव्य - प्रेम रस बरस रहा है। रसिकों के शिरोमणि , इन्द्रनीलमणि के समान कांति वाले कौस्तुभ - मणि धारण किये हुए श्यामसुन...

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तू तो कृपा की है मूरति राधारानी

"तू तो कृपा की है मूरति राधारानी, मेरी राधारानी" - जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी मेरी श्री राधारानी कृपा की ही साक्षात मूर्ति हैं।

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अहो प्राणेश्वर प्राणाधार

“अहो प्राणेश्वर प्राणाधार। रसिक रंगीलो गुन गरबीलो, नागर नंद कुमार। " -जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज ओ रसिक रंगीलो, गुण गरबीलो नागर श्री कृष्ण, आप ही...

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कितना ही दुःख देवें तोहि श्याम श्यामा

राधा कृष्ण के प्रतिकूल व्यवहार के कारण भी जो प्रेम हर क्षण बड़े वही प्रेम निस्वार्थ एवं निष्काम प्रेम है।

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धन वृन्दावन धाम है

वृन्दावन धाम धन्य है, वृन्दावन नाम धन्य है, और धन्य हैं वृन्दावन के रसिक जो नित्य श्यामा-श्याम का सुमिरन करते हैं और युगल-रस में डूबे हुए हैं।

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भलो बुरो जस तेरो री किशोरी राधे

हे किशोरी राधे, चाहे भला हूँ या बुरा हूँ, मैं आपका हूँ।

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तो पे कोटि प्रान दऊँ वार

ओह राधे, अलेबली सरकार (जो अद्वितीय है), मैं आप पर अनगिनत जीवन बलिदान करना चाहता हूं। मैं अपने आप को बार-बार आप पर बलिदान करता रहूँगा।

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पाय तिहारो प्रेम किशोरी

हे किशोरी श्री राधे! आप से प्रेम का उपहार प्राप्त करके मैं ब्रज की एक एक गली में विहरण करूँगा।

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श्री राधे जू ही माधव

श्री राधे जू हैं माधव, माधव राधा, श्री राधा तजि भजत श्याम अपराधा - (हमारो धन राधा) जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी भाग 1 (83) श्री राधा ...

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टुक निज-जन क्रंदन सुनी पावे, तजि श्यामहू निज जन पह धावे

"टुक निज-जन क्रंदन सुनी पावे, तजि श्याम हू निज जन पह धावे, जब ऐसी सरल सुकुमार,फिकिर मोहि काहे की।" - जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज हमारी स्वामिनी जी...

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वृन्दावन धाम सम गोविन्द राधे

कहीं भी कोई जगह नहीं है, जो कि 'श्री वृंदावन धाम' से उत्तम है।

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मेरे पाप लिख बहीखाता धरो श्यामा

ओह श्यामा, जबकि मैं पाप कर रहा हूं और आप मेरे पापों का विवरण रख रहे हैं, लेकिन आपका पवित्र नाम मेरे पापों के सभी विवरण जला देगा और मेरे दिमाग को शुद्ध...

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श्री कृष्ण वृन्दावन गोविन्द राधे

श्री कृष्ण लगातार वृंदावन में नयी नयी लीला करते हैं।

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कहँ लौं बैकुंठ लोकहूँ, रूचि नहीं तुक सपनेहुँ मोरी

यहां तक कि 'बैकुंठ' का रस सपने में भी मुझे आकर्षित नहीं करता है। एक नटखट श्रीकृष्ण और भोरी श्री राधारानी का युगल रस ही मुझे केवल आकर्षित करता है।

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वृन्दावन रसिक राजधानी

श्री वृंदावन रसिकों की राजधानी है। जगदगुरु श्री कृपालु जी कहते हैं कि यह कहना पर्याप्त है कि श्री वृंदावन का महत्व श्यामसुंदर द्वारा कुछ ही हद तक, श्...

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नहीं उऋण कबहुँ उपकार

हे श्री राधा, मैं कभी भी अपके कृपा के ऋण से मुक्त नहीं हो सकता। मैं अपने आप को बार-बार आपको न्योछावर करता हूँ।

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नरक स्वर्ग अपवर्ग आदि की

हे अज्ञानी प्राणी, तुम बिना किसी उदेश्य के नरक और स्वर्ग आदि में भटकते हो ? तुम श्री राधा के नित्य दास हो। इसे पहचानने की कोशिश करो ।

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कहँ लौं बैकुंठ लोकहूँ रूचि नहीं तुक सपनेहुँ मोरी

मेरी रुचि अब वैकुण्ठ लोक में भी तनिक मात्र नहीं रही, यहाँ तक कि स्वप्न में भी मैं वहाँ जाने की इच्छा नहीं करता। मुझे तो बस एक ओर वे चंचल नन्दनन्दन (श...

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जो भी मेरी प्यारी पर जाए वारी वारी

जो भी राधारानी पर अपना सर्वस्व लुटायेगा, मैं उस बड़भागी जीव पर अपना सर्वस्व लुटाऊंगा।

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श्यामा प्राण धन श्याम

श्रीकृष्ण का जीवन-प्राण श्री राधा हैं और श्री राधा का जीवन-प्राण श्रीकृष्ण हैं। श्री राधा और कृष्ण दोनों मेरे जीवन-प्राण हैं।

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जोई भज ‘राधा राधा

जो जीव ‘राधा राधा’ निरंतर भजता है उसको श्री किशोरी जी अपना लेती हैं और अपनी प्रेम सुधा भक्ति देती हैं, ऐसी कृपालु श्री राधा हैं।

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नित्य विहार करत बनि सहचरी

श्री राधारानी के अनन्य भक्त, उन्ही की सहचरी बन कर नित्य विहार का रस पाते हैं।

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मम स्वामिनी गुन की आगरी

जिनकी चाल मस्त हाथी के समान है, जिनकी सुन्दर छवि है, उनका नाम श्री राधा है और वह सब गुणों से युक्त हैं।

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तेहि मोहिं साधन हीन जान के रसिकन दई बताई

मुझे पूरी तरह से साधन हीन देखते हुए, रसिक संतों ने दिव्य खजाने के रहस्य के बारे में बताया है । जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं, "यह अनमोल खजान...

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जेहि रस लगी हरि हर तरसत

“ जेहि रस लगी हरि हर तरसत, बरसत एहि दरबार । ” - जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज भगवान ब्रह्मा, विष्णु, शंकर आदि भी जिस दिव्य आनंद रसामृत के लिए लालियत ...

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श्यामा श्याम नाम रूप लीला गुण धामा

श्री राधा कृष्ण का नाम, रूप, लीला, गुण, धाम का गान उनके रूप ध्यान युक्त आंसू बहा कर करिये।

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पतित जनन हित तोहिं तजि

हे राधे! दीन और पतित जन के लिए पूरे विश्व में आपके आश्रय की तरह कोई आश्रय नहीं है। तुम ही केवल मेरी गति मति हो, तुम्हारे सिवाय मेरा कोई नहीं है।

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ऐसी कृपा करू कृपामयी राधे

ओह दयामयी राधे, मुझे आप ऐसा आशीष दो कि मैं आपको आधे क्षण के लिए भी नहीं भूलूँ l

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करू ‘कृपालु’ राधे राधे की, रटना आठों याम

“ करू ‘कृपालु’ राधे राधे की, रटना आठों याम । - जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज श्री राधे के नाम की महिमा पर विचार करते हुए, हर क्षण लगातार राधा राधा...

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"तू ही मेरी मैं भी तेरी, मेरी प्यारी राधे"

"तू ही मेरी मैं भी तेरी मेरी प्यारी राधे" - जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज हे मेरी प्यारी राधा! आप ही केवल मेरी हैं और मैं भी आपकी हूँ।

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जेहि रस लगी हरि हर तरसत

भगवान ब्रह्मा, विष्णु, शंकर आदि भी जिस दिव्य आनंद रसामृत के लिए लालियत रहते हैं, वह रस श्री राधा रानी के दरबार में नित्य बरस रहा है।

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धन वृन्दावन धाम है

वृन्दावन धाम धन्य है, वृन्दावन नाम धन्य है, और धन्य हैं वृन्दावन के रसिक जो नित्य श्यामा-श्याम का सुमिरन करते हैं और युगल-रस में डूबे हुए हैं।

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जो भी मेरी प्यारी पर जाए वारी वारी

जो भी राधारानी पर अपना सर्वस्व लुटायेगा, मैं उस बड़भागी जीव पर अपना सर्वस्व लुटाऊंगा।

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पाय तिहारो प्रेम किशोरी

हे किशोरी श्री राधे! आप से प्रेम का उपहार प्राप्त करके मैं ब्रज की एक एक गली में विहरण करूँगा ।

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मेरे पाप लिख बहीखाता धरो श्यामा

ओह श्यामा, जबकि मैं पाप कर रहा हूं और आप मेरे पापों का विवरण रख रहे हैं, लेकिन आपका पवित्र नाम मेरे पापों के सभी विवरण जला देगा और मेरे दिमाग को शुद्ध...

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जोई भज ‘राधा राधा

जो जीव ‘राधा राधा’ निरंतर भजता है उसको श्री किशोरी जी अपना लेती हैं और अपनी प्रेम सुधा भक्ति देती हैं, ऐसी कृपालु श्री राधा हैं ।

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युगल रस वृन्दावन बरसे

युगल रस वृन्दावन बरसे, मणि रमणी राधा गज गमनि, कमनी मनहर से || - जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज - प्रेम रस मदिरा, युगल माधुरी (4) वृन्दावन में श्यामा - ...

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कितना ही दुःख देवें तोहि श्याम श्यामा

राधा कृष्ण के प्रतिकूल व्यवहार के कारण भी जो प्रेम हर क्षण बड़े वही प्रेम निस्वार्थ एवं निष्काम प्रेम है।

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नरक स्वर्ग अपवर्ग आदि की

हे अज्ञानी प्राणी, तुम बिना किसी उदेश्य के नरक और स्वर्ग आदि में भटकते हो ? तुम श्री राधा के नित्य दास हो। इसे पहचानने की कोशिश करो |

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कहँ लौं बैकुंठ लोकहूँ, रूचि नहीं तुक सपनेहुँ मोरी

यहां तक कि 'बैकुंठ' का रस सपने में भी मुझे आकर्षित नहीं करता है। एक नटखट श्रीकृष्ण और भोरी श्री राधारानी का युगल रस ही मुझे केवल आकर्षित करता है ।

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श्यामा श्याम नाम रूप लीला गुण धामा

श्री राधा कृष्ण का नाम, रूप, लीला, गुण, धाम का गान उनके रूप ध्यान युक्त आंसू बहा कर करिये।

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“मन तेरो सांचो यार ब्रजराज कुमार | रसिकन दरबार तेरो सांचो घर बार || ”

हे मन! तेरा सच्चा यार ब्रज का राजकुमार श्री कृष्ण ही है और रसिकों का संग एवं उनका दरबार ही तेरा वास्तविक घर है |

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राधे नाम लेने वाला गोविन्द राधे

वह जो श्री राधा का नाम जप करता है, वह कभी भी और कहीं भी श्री राधा को बुला सकता है।

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नित्य विहार करत बनि सहचरी

श्री राधारानी के अनन्य भक्त, उन्ही की सहचरी बन कर नित्य विहार का रस पाते हैं।

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मम स्वामिनी गुन की आगरी

जिनकी चाल मस्त हाथी के समान है, जिनकी सुन्दर छवि है, उनका नाम श्री राधा है और वह सब गुणों से युक्त हैं।

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श्यामा प्राण धन श्याम

श्रीकृष्ण का जीवन-प्राण श्री राधा हैं और श्री राधा का जीवन-प्राण श्रीकृष्ण हैं। श्री राधा और कृष्ण दोनों मेरे जीवन-प्राण हैं।

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नहीं उऋण कबहुँ उपकार

हे श्री राधा, मैं कभी भी अपके कृपा के ऋण से मुक्त नहीं हो सकता। मैं अपने आप को बार-बार आपको न्योछावर करता हूँ।

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भलो बुरो जस तेरो री किशोरी राधे

हे किशोरी राधे, चाहे भला हूँ या बुरा हूँ, मैं आपका हूँ।

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तेहि मोहिं साधन हीन जान के रसिकन दई बताई

मुझे पूरी तरह से साधन हीन देखते हुए, रसिक संतों ने दिव्य खजाने के रहस्य के बारे में बताया है | जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं, "यह अनमोल खजाना...

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ऐसी कृपा करू कृपामयी राधे

ओह दयामयी राधे, मुझे आप ऐसा आशीष दो कि मैं आपको आधे क्षण के लिए भी नहीं भूलूँ l

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सदा मुस्कुराते रहें गोविन्द राधे, मेरी शुभकामना है उनको बता दे

मैं हृदय से यही कामना करता हूँ कि श्री राधा कृष्ण हर क्षण मुस्कुराते रहें ।

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श्री कृष्ण वृन्दावन गोविन्द राधे

श्री कृष्ण लगातार वृंदावन में नयी नयी लीला करते हैं।

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नर तनु शरद चाँदनी बीते, पुनि अँधियारी रात

जैसे कुछ क्षणों में पूर्णिमा की रात्री व्यतीत हो जाती है, उसी प्रकार यह मानव जीवन भी कुछ क्षणों में समाप्त हो जाएगा, यदि इस मानव जीवन में हरी भक्ति नह...