सभी संत
क
रसिक संत जीवनी
केलिमाल
जीवन चरित
ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।
श्री केलिमाल वाणी संग्रह
general
कुंजबिहारी हौं तेरी बलाइ
कुंजबिहारी की भावना है प्यारी जी आप मुझे अंग संग कर कुंजों विहार कर रही हैं , मैं आप की बलायें यानि बलिहारी पर लेता हूँ, आप अपनी कृपालुता बरसाती रहें ...
general
ऐ हरी मो सौ न बिगारन कौ
एक हम जीव हैं जिन को हमेशा सभी काम बिगड़ने की आदत पड़ी हुई है और दूसरी तरफ अति अकारण करुणा वरुणालय करुणामय बिहारी जी जो हमारा काम बनाने में ही लगे रहते...
general
आज तृण टूटत है री, ललित त्रिभंगी पर
कुंजमहल में विराजमान प्यारे पर प्यारी जी कृपा बरसा रही हैं। प्यार से कहती हैं - हे प्यारे ! मैं बिहारी बनूंगी और आप प्यारी बने। दोनों ने अपने रूप सज्...