जो हो कृपा बिहारिन की तो, वृन्दावन रस चाखै। जमुना तट बंसीवट बसकर, राधे गोविन्द भाखै॥ [1] फिरत रहै बन वीथिन कुञ्जन, हेरत कुञ्जविहारी। 'लक्षदास' ते अति ...