मैं कब मधुसूदन के घनीभूत अमृत-रस-पूर्ण विचित्र एवं अनन्त चरित्रों का मधुर-मधुर रीति से गायन करती हुई और उनके अभिराम केलि-भवन का सम्मार्जन तथा मलयज मकर...