सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
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जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री नारद पंचरात्र वाणी संग्रह

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श्रीकृष्णो जगतां तातो जगन्माताच राधिका

श्रीकृष्णो जगतां तातो जगन्माताच राधिका। पितुः शतगुणामाता वन्द्या पूज्या गरीयसी॥ - नारद पंचरात्र (2.6.7) शिवजी पार्वती माता से कहते हैं कि इस ब्रह्मा...

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राधा-चर्वित-तांबुलं चखाद मधुसूदनः

भगवान शिव कहते हैं कि मधुसूदन (श्री कृष्ण) श्री राधा द्वारा चर्वित ताम्बूल भी खाते हैं। वे दोनों एक ही हैं, श्री राधा और श्री कृष्ण में उसी प्रकार कोई...

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आराध्य सुचिरं कृष्णं

अत्यधिक काल तक श्री कृष्ण की आराधना करने से जो फल प्राप्त होता है, वही फल श्री राधा की आराधना करने से स्वल्प (बहुत कम समय) में प्राप्त हो जाता है।

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अपूर्वं राधिकाख्यानं

श्री महादेव जी कहते हैं: यह राधिकाख्यान अपूर्व, गोपनीय, अत्यन्त दुर्लभ, तत्काल मुक्तिदायक, शुद्ध, वेदसार, तथा सुपुण्यप्रद है।

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त्रैलोक्यपावनीं राधां सन्तो सेवन्त नित्यश

त्रैलोक्यपावनीं राधां सन्तो सेवन्त नित्यशः। यत्पादपद्मे भक्त्यार्घ्य्म नित्यं कृष्णो ददाति च॥ - नारद पंचरात्र (2.6.11) संत जन श्री राधा की नित्य भ...

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दैवदोपेण महता ये च निन्दन्ति राधिकाम्

यदि कोई दैवदोष (पूर्वकर्मों) से कोई श्री राधिका की निन्दा करता है तो वह वाममार्गी, मूर्ख, पापी तथा साक्षात श्री हरि का द्वेषी है।

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अपूर्वं राधिकाख्यानं

श्री राधिका का आख्यान अत्यंत अद्भुत एवं दुर्लभ है क्योंकि वेदों, पुराणों, इतिहासों एवं वेदांगों में यह परम् गोपनीय है।

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यथा ब्रह्मस्वरूपश्च श्रीकृष्ण: प्रकृते: पर:

भगवान शिव नारद मुनि से कहते हैं - जैसे ब्रह्मस्वरूप श्रीकृष्ण प्रकृति से परे हैं, उसी प्रकार राधा भी ब्रह्मस्वरूपिणी, निर्लिप्ता तथा प्रकृति से परे है...

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वने वनचरी पातु वृन्दावनविनोदिनी

(भगवान शिव नारद जी से कहते हैं) वनों में विहार करने वाली, श्री वृंदावन विनोदिनी श्री राधा मेरी वन में रक्षा करें। वे सर्वेश्वरी, विरजेश्वरी, पराशक्ति ...

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सौभाग्यासु सुन्दरीषु राधा कृष्णप्रियासु च

जैसे वानरों में हनुमान् और पक्षियों में गरुड सर्वश्रेष्ठ हैं, वैसे ही श्रीकृष्ण से प्रेम करने वाली समस्त सौभाग्यवती स्त्रियों में श्री राधा ही श्रेष्ठ...

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महावृन्दावनं तत्र केली वृन्दावनानि च

श्री वृंदावन वह दिव्य धाम है जहां श्री राधा माधव नित्य ही अंतरंग केलि में निमग्न रहते हैं।