विश्वभर्ता श्रीकृष्णचन्द्र एकान्त में अत्यन्त प्रेमार्द्र होकर जिनकी पद-धूलि अपने मस्तक पर धारण करते हैं, जिनके प्रेम में निमग्न होने पर उनके हाथ से ...