हे अशरण शरण श्यामसुन्दर ! अब मैं तुम्हारी शरण में आ गया हूँ। अनादिकाल से आज तक अनाथ की भाँति चराचरात्मक इस संसार में बार-बार पैदा होकर सदा भटकता रहा।...