सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री आनंदघन
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री आनंदघन वाणी संग्रह

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प्रेमरंग-रस-रगमगी, सुंदर ब्रजबन-भूमि

ब्रज-वृन्दावन की यह सुंदर भूमि प्रेम के रंगों और दिव्य रस से पूरी तरह सराबोर है। यहाँ ब्रज के जीवन-प्राण, आनंद के मेघ (श्री कृष्ण), नित्य-निरंतर झूमते...

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मोहन मदनगुपाल को, मोहन यह ब्रज देस

मदनगोपाल का यह मनोहर ब्रजदेश परम मंगलकारी और उदार है, जहाँ नंदनंदन श्री कृष्ण अपनी दिव्य लीला से संपूर्ण ब्रज को शोभायमान करते हुए विराजमान हैं।

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कृपा करैं ब्रजनाथ जौ

कृपा करैं ब्रजनाथ जौ, ब्रजदरसन कै नैंन। या ब्रजबन की माधुरी, तौ परसै उर-एन॥ - श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (7) यदि ब्रजनाथ कृपा करें, तभ...

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जमुना कूल सुहावनो, ललित बलित तरु-बेलि

श्री यमुना जी का वह सुंदर किनारा, जहाँ अत्यंत मनोहर वृक्ष और लताएँ एक-दूसरे से लिपटी हुई हैं, वह स्थान साक्षात् श्री राधा-रमण की परम मधुर और रसमय क्री...

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ब्रजबिलास रसरीति को

ब्रज-विलास की रस-रीति का वर्णन भला कैसे संभव है, जहाँ पूर्ण-कला-निधान भगवान श्रीकृष्णचंद्र ने अपनी दिव्य क्रीड़ाओं से उस भूमि को पावन किया है?

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ब्रजमोहन ब्रज मैं बसै, नित ब्रजमंगल रूप

ब्रज को मोहित करने वाले श्री कृष्ण (ब्रजमोहन) सदैव ब्रज में ही निवास करते हैं और उनका स्वरूप साक्षात् ब्रज का मंगल करने वाला है। वे ब्रज के भीतर और बा...

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श्रीब्रजमोहन -माधुरी,रही नैन-मन छाय

ब्रज में मोहन श्रीकृष्ण की माधुरी नयनों और मन में नित्य छाई रहती है। वे ऐसा अद्भुत रस बरसाते हैं कि जितना पान किया जाए, उतनी ही प्यास बढ़ती जाती है; त...

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सब-सुख-सोभा-मूल बृंदावन धन मेरे

श्री आनंदघन कह रहे है "समस्त सुख तथा शोभा का मूल श्री वृन्दावन धाम ही मेरा जीवन धन है, जहाँ नित्य श्री राधा मोहन का नाम गाऊंगा और प्रातः संध्या श्री य...

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जो कोऊ वृन्दावन बसि जानै

जो कोई भी समस्त इच्छाओं को त्याग कर वृंदावन में वास करता है, और दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण की उपासना करता है, वह परमार्थ की पूर्णता को प्राप्त करता है...

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राधा राधा राधा कहौं। कहि कहि राधा राधा लहौं

श्री राधा नाम की महिमा इतनी है कि भाव से निरंतर 'श्री राधा-राधा' कहने से 'श्री करुणामयी राधे' उस जीव को अपना लेती हैं। श्री राधा को ही सब प्रकार से जा...

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जो कोऊ वृन्दावन बसि जानै

जो कोई भी समस्त इच्छाओं को त्याग कर वृंदावन में वास करता है, और दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण की उपासना करता है, वह परमार्थ की पूर्णता को प्राप्त करता है...